रियल एस्टेट में 96% निवेशक AI में निवेश बढ़ा रहे हैं, फिर भी readiness gap बड़ा है। जानें बाधाएँ, सही use-cases और 90 दिनों का practical रोडमैप।

रियल एस्टेट में AI अपनाना: इरादा है, तैयारी नहीं
रियल एस्टेट में इस वक्त एक अजीब-सा विरोधाभास चल रहा है: AI पर खर्च बढ़ाने की लगभग सर्वसम्मति है, लेकिन AI के लिए बुनियादी तैयारी अधूरी है। 2025 के एक संस्थागत निवेशक सर्वे में 96% निवेशक AI में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे हैं—फिर भी 93% को अपनाने में “बड़ी बाधाएँ” दिख रही हैं। यानी उद्योग दौड़ना चाहता है, पर जूते अभी ठीक से बंधे नहीं हैं।
ये बात खासकर दिसंबर 2025 में ज़्यादा मायने रखती है, जब साल के अंत में कंपनियाँ 2026 के बजट, टेक रोडमैप और टीम स्ट्रक्चर पर फैसला करती हैं। मैंने कई टीमों में ये पैटर्न देखा है: सबको “AI चाहिए”—लेकिन जब पूछा जाए “किस डेटा पर, किस प्रक्रिया में, किस जिम्मेदारी के साथ?” तो कमरे में खामोशी छा जाती है।
इस पोस्ट को “रियल एस्टेट और प्रॉपटेक में AI” सीरीज़ के हिस्से के रूप में पढ़िए। फोकस यह है कि AI को सिर्फ टूल की तरह नहीं, डील-फ्लो, वैल्यूएशन, अंडरराइटिंग और स्मार्ट बिल्डिंग मैनेजमेंट में एक भरोसेमंद सिस्टम की तरह कैसे लगाया जाए—और कहाँ-कहाँ उद्योग अभी फिसल रहा है।
सर्वे का साफ संदेश: AI “जरूरी” है, पर बाधाएँ असली हैं
सीधा निष्कर्ष: AI की मांग बढ़ रही है, लेकिन readiness gap बहुत बड़ा है। सर्वे के कुछ नंबर ऐसे हैं जिन्हें हर रियल एस्टेट लीडर को दीवार पर टांग देना चाहिए:
- 96% अगले साल AI निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं
- 100% अपनाने/अपनाने की योजना में हैं
- 90% के पास AI लीड/टीम है या बन रही है
- 93% को adoption में बड़ी बाधाएँ दिखती हैं
और बाधाएँ भी “सॉफ्ट” नहीं हैं—ये वही चीजें हैं जिन पर रियल एस्टेट दशकों से अटकता आया है:
- इन-हाउस विशेषज्ञता की कमी (43%)
- रेगुलेटरी/कम्प्लायंस चिंता (42%)
- बजट सीमाएँ (39%)
- डिसेंट्रलाइज़्ड/बिखरा डेटा (36%)
यहां असली सबक यह है: AI प्रोजेक्ट टेक प्रोजेक्ट नहीं है; यह ऑपरेटिंग मॉडल प्रोजेक्ट है। अगर डेटा, जवाबदेही और प्रक्रिया साफ नहीं है, तो AI सिर्फ “चैट” करेगा—काम नहीं करेगा।
रियल एस्टेट में AI कहाँ काम कर रहा है (और क्यों)
पहला नियम: AI को वहीं लगाइए जहाँ निर्णय “टेक्स्ट + समय” से बनता है। रियल एस्टेट की बहुत-सी प्रक्रियाएँ दस्तावेज़ों में छुपी होती हैं—लीज, ओएम, टर्मशीट, DD चेकलिस्ट, साइट विज़िट नोट्स, मैनेजमेंट रिपोर्टिंग। इसलिए शुरुआती सफलता इन use-cases में दिख रही है:
1) डॉक्यूमेंट एनालिसिस: ROI जल्दी दिखता है
सर्वे में 67% ने डॉक्यूमेंट एनालिसिस को प्रमुख उपयोग बताया। इसका कारण सीधा है: दस्तावेज़ पढ़ना, सार निकालना, क्लॉज़ फ्लैग करना—ये काम AI तेज़ करता है, और रिस्क भी नियंत्रित रहता है क्योंकि आउटपुट reviewable है।
व्यावहारिक उदाहरण:
- ओएम/फ्लायर से rent roll highlights, WALE, escalation clauses निकालना
- लीज़ क्लॉज़ में termination, CAM reconciliation, exclusivity जैसी चीजें फ्लैग करना
- DD के दौरान “क्या छूटा?” की सूची बनाना
2) पोर्टफोलियो मॉनिटरिंग: ऑपरेशन्स की भाषा में AI
61% ने पोर्टफोलियो मॉनिटरिंग बताया। यहां AI का फायदा यह है कि यह अलग-अलग स्रोतों से आने वाले संकेत (ऑक्यूपेंसी, रेंट कलेक्शन, कंप्लेंट्स, मेंटेनेंस टिकट, एनर्जी) को जोड़कर अर्ली वार्निंग दे सकता है।
यह स्मार्ट बिल्डिंग मैनेजमेंट के लिए आधार बनता है—क्योंकि AI तभी “स्मार्ट” होगा जब बिल्डिंग का डेटा सही, नियमित और तुलनीय होगा।
3) इन्वेस्टमेंट मेमो और स्क्रीनिंग: स्पीड बढ़ती है, पर गार्डरेल चाहिए
56% ने इन्वेस्टमेंट मेमो बनाने में AI का उपयोग/रुचि दिखाई। यह आकर्षक है क्योंकि इससे डील टीम का समय बचता है। लेकिन मैंने देखा है कि मेमो में “कॉन्फिडेंस” जल्दी आ जाता है—और यहीं गलती होती है।
सही तरीका: AI को पहला ड्राफ्ट बनाने दें, लेकिन अंतिम मेमो में:
- हर नंबर का स्रोत (फाइल/टैब/सेल) ट्रेस हो
- assumptions स्पष्ट लिखी हों
- reviewer sign-off अनिवार्य हो
सबसे बड़ा जोखिम: अंडरराइटिंग में “हैलुसिनेशन” और नंबरों का भ्रम
सर्वे में संकेत साफ है कि निवेशक अंडरराइटिंग पर अभी भी सतर्क हैं। और मैं इससे सहमत हूँ। कारण यह नहीं कि AI “बेकार” है; कारण यह है कि अंडरराइटिंग में गलती का नुकसान बड़ा होता है, और डेटा अक्सर:
- अलग-अलग फॉर्मेट में होता है (PDF, Excel, scans)
- एक जैसा नहीं होता (नामकरण, यूनिट मिक्स, एरिया माप)
- अधूरा/पुराना हो सकता है
AI टेक्स्ट में तेज़ है, लेकिन स्प्रेडशीट-ग्रेड सटीकता के लिए संरचित डेटा और नियम चाहिए। इसलिए अंडरराइटिंग के लिए बेहतर अप्रोच यह है:
- LLM को “कैलकुलेटर” न बनाइए; उसे एक्सट्रैक्टर + चेकर बनाइए
- नंबर निकालने के लिए स्ट्रक्चर्ड पाइपलाइन (टेबल extraction + validation rules) रखिए
- मॉडल से दो उत्तर नहीं, एक उत्तर + evidence मांगिए (किस पेज/किस सेल से)
याद रखने वाली लाइन: रियल एस्टेट में AI का काम “निर्णय लेना” नहीं, “निर्णय के लिए सबूत व्यवस्थित करना” है।
AI readiness gap क्यों बनता है: चार जड़ समस्याएँ
AI अपनाने की रफ्तार अक्सर “टूल” से शुरू होती है, जबकि तैयारी “फाउंडेशन” से होती है। यही mismatch gap बनाता है।
1) डेटा बिखरा है—और किसी की जिम्मेदारी नहीं
जब लीज़ डेटा एक सिस्टम में, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट दूसरे में, और DD दस्तावेज़ किसी ड्राइव में पड़े हों—AI को समझ नहीं आता कि “सच” कहाँ है। सर्वे में 98% अगले दो साल में डेटा सिस्टम सुधारना प्राथमिकता मान रहे हैं।
काम की सलाह: “single source of truth” एक दिन में नहीं बनता। पहले 2-3 क्रिटिकल ऑब्जेक्ट चुनें:
- Asset / Property master
- Lease abstract key fields
- Deal pipeline stages
2) कम्प्लायंस डर: नीति है, व्यवहार नहीं
74% के पास AI governance policies हैं—अच्छा संकेत। पर policy तभी काम करती है जब:
- कौन-सा डेटा AI टूल में जा सकता है, स्पष्ट हो
- vendor risk assessment हो
- logging/audit trail हो
3) विशेषज्ञता की कमी: AI टीम बनाना = सिर्फ “डेटा साइंटिस्ट” नहीं
43% ने internal expertise को बाधा माना। अक्सर कंपनियाँ या तो:
- सिर्फ IT पर छोड़ देती हैं
- या सिर्फ बिज़नेस पर छोड़ देती हैं
सही टीम:
- बिज़नेस ओनर (Acquisitions/AM/PM)
- डेटा/इंटीग्रेशन लीड
- लीगल/कम्प्लायंस
- “AI प्रोडक्ट” सोच वाला व्यक्ति (वर्कफ़्लो + adoption)
4) बजट: टूल सस्ता, बदलाव महंगा
AI टूल्स की कीमत घट रही है, लेकिन असली खर्च आता है:
- डेटा साफ करने में
- इंटीग्रेशन में
- ट्रेनिंग/चेंज मैनेजमेंट में
इसलिए ROI की गणना “लाइसेंस फीस” से नहीं, घंटे बचत + रिस्क घटाव + डील स्पीड से करनी चाहिए।
90 दिनों का practical रोडमैप: AI को पायलट से प्रोडक्शन तक कैसे ले जाएँ
सीधा जवाब: एक ही use-case चुनिए, डेटा सीमित रखिए, और गवर्नेंस पहले दिन से जोड़िए। 90 दिनों की योजना इस तरह रखी जा सकती है:
चरण 1 (दिन 1-15): Use-case और सफलता की परिभाषा
- एक use-case चुनें: जैसे OM से डेटा extraction + deal screening summary
- सफलता मीट्रिक्स तय करें:
- प्रति डील analyst time कितने घंटे घटे?
- extraction accuracy %
- reviewer rework %
चरण 2 (दिन 16-45): डेटा पाइपलाइन और गार्डरेल
- 50-100 पुराने डील डॉक्यूमेंट पर टेस्ट सेट बनाएं
- fields तय करें (जैसे NOI, capex notes, occupancy)
- validation rules: missing value, range checks
- access control: कौन run करेगा, कौन approve करेगा
चरण 3 (दिन 46-75): वर्कफ़्लो में एम्बेड + ट्रेनिंग
- आउटपुट वहीं दिखाएं जहाँ टीम काम करती है (CRM/deal room)
- “AI review checklist” बनाएं
- 2 घंटे की ट्रेनिंग नहीं, 3 हफ्ते का enablement रखें (office hours + templates)
चरण 4 (दिन 76-90): स्केल/स्टॉप का फैसला
- 3 मीट्रिक्स के आधार पर फैसला:
- समय बचत
- error rate
- adoption rate (कितने लोग नियमित उपयोग कर रहे हैं)
अगर ये तीनों ठीक हैं, तभी स्केल करें। वरना use-case बदलें—AI को दोष देना आसान है, पर अक्सर समस्या डेटा और प्रक्रिया होती है।
“बड़े खिलाड़ी आगे हैं”—छोटी टीमों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए?
सर्वे में यह भी संकेत है कि बड़े संस्थागत निवेशक अपेक्षाकृत आगे हैं। छोटों के लिए इसका मतलब हार नहीं है—बस रास्ता अलग है:
- बेस्पोक टूल बनाने की जल्दी मत कीजिए। पहले off-the-shelf + सही गवर्नेंस
- “एक प्लेटफ़ॉर्म, तीन काम” पर फोकस: extraction, workflow, audit
- बाहरी पार्टनर चुनते समय 3 सवाल:
- डेटा कहाँ स्टोर होगा?
- मॉडल आउटपुट का evidence कैसे मिलेगा?
- ऑडिट/लॉगिंग कितनी डिटेल में है?
छोटी टीमों का फायदा यह है कि approval layers कम होते हैं—अगर दिशा साफ हो तो adoption तेज़ हो सकता है।
आगे क्या: 2026 में AI readiness किसकी जीत तय करेगी?
रियल एस्टेट में AI का भविष्य “कौन-सा मॉडल सबसे तेज़ है” पर नहीं टिकेगा। यह तय होगा कि किसके पास सबसे साफ डेटा, सबसे स्पष्ट गवर्नेंस, और सबसे अनुशासित वर्कफ़्लो है। सर्वे के नंबर बताते हैं कि उद्योग ने मानसिक रूप से फैसला कर लिया है—AI चाहिए। अब बाकी काम execution का है।
अगर आप इस “रियल एस्टेट और प्रॉपटेक में AI” सीरीज़ को फॉलो कर रहे हैं, तो मेरा सुझाव सीधा है: 2026 की योजना में AI को “इनिशिएटिव” नहीं, ऑपरेटिंग क्षमता की तरह रखें। 90 दिनों में एक use-case को प्रोडक्शन-ग्रेड बनाइए, और फिर स्केल कीजिए।
और एक सवाल अपने आप से पूछिए: आपकी टीम AI से तेज़ चलना चाहती है—पर क्या आपके डेटा और फैसले लेने की आदतें भी उतनी ही तैयार हैं?