छोटे EVs में AI: Rivian की ‘Also’ से सीखें

ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन में AIBy 3L3C

Rivian की स्पिनऑफ ‘Also’ छोटे, किफायती EVs पर दांव लगा रही है। जानिए AI कैसे बैटरी, दक्षता और माइक्रो-मोबिलिटी अनुभव को बेहतर बनाता है।

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छोटे EVs में AI: Rivian की ‘Also’ से सीखें

80% कार-ट्रिप्स 15 मील (लगभग 24 किमी) या उससे कम होती हैं, और करीब आधी 6 मील (लगभग 10 किमी) से कम। फिर भी शहरों में हम जिन गाड़ियों से रोज़ का काम चलाते हैं, वे अक्सर SUV/ट्रक जितनी बड़ी, भारी और ऊर्जा-खपत वाली होती जा रही हैं। समस्या सिर्फ पार्किंग या ट्रैफिक नहीं है—यह ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन, और कुल लागत का सवाल है।

इसी जगह Rivian से निकली माइक्रो-मोबिलिटी स्पिनऑफ कंपनी “Also” दिलचस्प केस-स्टडी बनती है। Also का फोकस “छोटे EVs” और “कारों से आगे के मूवमेंट के तरीके” हैं। उनके लक्ष्य सीधे-सीधे चुभते हैं: कई लोकल कार-माइल्स को ऐसे वाहनों से बदलना जो 10–50 गुना ज्यादा दक्ष हों, और फिर भी मज़ेदार व किफायती लगें।

हमारी सीरीज़ “ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन में AI” के संदर्भ में यह कहानी इसलिए काम की है क्योंकि छोटे EVs को सफल बनाने में हार्डवेयर जितना, उतना ही AI-ड्रिवन डिजाइन, बैटरी ऑप्टिमाइज़ेशन, और सॉफ्टवेयर-फर्स्ट अनुभव निर्णायक होने वाला है।

Rivian की स्पिनऑफ ‘Also’ असल में संकेत क्या देती है?

Also का मतलब सिर्फ एक नई कंपनी नहीं है—यह एक संकेत है कि EV इंडस्ट्री “बड़ी गाड़ी = बेहतर” वाली आदत से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, इस स्पिनऑफ को $105 मिलियन का VC निवेश मिला है और Rivian की इसमें “substantial minority stake” बनी रहेगी। Rivian CEO RJ Scaringe इसके चेयरमैन और बोर्ड में भी हैं। यानी यह प्रयोग साइड-प्रोजेक्ट नहीं, रणनीतिक दांव है।

Also का लक्ष्य 2026 की शुरुआत में अपना फ्लैगशिप प्रोडक्ट लॉन्च करना है—पहले अमेरिका और यूरोप में। साथ में एक और महत्वपूर्ण बात: कंपनी कहती है कि वे मोटर, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर जैसे कोर कम्पोनेंट्स को इन-हाउस बनाएँगे (एक तरह की वर्टिकल इंटीग्रेशन सोच)।

यह फैसला AI के संदर्भ में बहुत बड़ा है। जब आपके पास हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर का कंट्रोल होता है, तब आप AI से:

  • ऊर्जा खपत को मिलीसेकंड-लेवल पर ट्यून कर सकते हैं
  • राइड-एक्सपीरियंस में पर्सनलाइज़ेशन ला सकते हैं
  • बैटरी हेल्थ और सेफ्टी में प्रेडिक्टिव सिस्टम जोड़ सकते हैं

छोटे EVs की असली जीत: “दक्षता” और “उपयोग” का मेल

छोटे EVs को अक्सर लोग “कमज़ोर” या “कम सुरक्षित” समझ लेते हैं। पर शहर-केंद्रित उपयोग के लिए सच्चाई उलटी है: ज़्यादातर दिन-प्रतिदिन के सफर में आपको 2 टन की गाड़ी नहीं, बल्कि स्मार्टली डिज़ाइन किया हुआ हल्का EV चाहिए।

Also जिस 10–50x efficiency की बात करती है, उसे समझने का सरल तरीका है: बड़े EVs में बैटरी बड़ी होती है, वजन बढ़ता है, रोलिंग रेजिस्टेंस और एयरो-ड्रैग बढ़ता है—और फिर उसी वजन को ढोने के लिए और ऊर्जा लगती है। छोटे EVs में उलटा होता है: कम वजन + छोटा फ्रंट एरिया + कम बैटरी = कम ऊर्जा लागत।

भारत के संदर्भ में (जहाँ दोपहिया/तीनपहिया पहले से मुख्य हैं) यह सोच और भी फिट बैठती है। 2025 के आख़िरी हिस्से में शहरी यात्राओं में “लास्ट-माइल” और “मिड-माइल” का दबाव बढ़ रहा है—फूड/ई-कॉमर्स डिलीवरी, ऑफिस-कम्यूट, मेट्रो-फीडर। ऐसे में छोटे EVs सिर्फ उपभोक्ता नहीं, फ्लीट और B2B के लिए भी मजबूत केस बनाते हैं।

AI यहाँ कहाँ-कहाँ फर्क डालता है?

छोटे EVs की सीमाएँ स्पष्ट होती हैं—कम बैटरी, कम रेंज, सीमित स्पेस। यहीं AI “कमी” को “डिज़ाइन-एडवांटेज” बना देता है:

  1. बैटरी रेंज का स्मार्ट प्रबंधन: AI मॉडल ड्राइवर के रूट/स्टॉप्स के पैटर्न से रेंज प्रेडिक्ट कर सकता है, और उसी हिसाब से पावर डिलीवरी, रीजन ब्रेकिंग, और थर्मल सेटिंग्स ट्यून कर सकता है।
  2. थर्मल मैनेजमेंट: छोटी बैटरी में तापमान नियंत्रण और भी महत्वपूर्ण है। AI-आधारित कंट्रोल लॉजिक बैटरी की उम्र और परफॉर्मेंस दोनों बढ़ाता है।
  3. राइड सेफ्टी: माइक्रो-मोबिलिटी में ADAS का “हल्का” वर्जन (जैसे फॉरवर्ड कोलिजन अलर्ट, लेन/एरिया असिस्ट, ऑब्जेक्ट डिटेक्शन) AI कंप्यूटर विज़न के जरिए संभव है—कम सेंसर में भी।

“कारों से आगे” वाली मोबिलिटी: AI एक इकोसिस्टम बनाता है

Also का वाक्य—“ways to move beyond cars”—मुझे इसलिए सही लगता है क्योंकि शहरों का भविष्य एक ही तरह की गाड़ी पर नहीं टिकेगा। आने वाले सालों में मोबिलिटी ज्यादा मल्टी-मोडल होगी: कभी मेट्रो, कभी ई-बाइक, कभी छोटा EV, और कभी कैब।

AI इसमें दो स्तरों पर काम करता है:

1) वाहन-स्तर (Vehicle Intelligence)

यहाँ AI का काम गाड़ी को ज़्यादा किफायती, सुरक्षित और सहज बनाना है:

  • ड्राइव मोड का ऑटो चयन (भीड़, ढलान, बारिश जैसी स्थितियों के आधार पर)
  • बैटरी हेल्थ का predictive maintenance
  • उपयोगकर्ता के अनुसार कंट्रोल-मैपिंग (नए राइडर vs अनुभवी)

2) नेटवर्क-स्तर (Mobility Intelligence)

यहाँ AI का काम एक शहर में हज़ारों वाहनों को बेहतर ढंग से चलाना है:

  • फ्लीट रूट ऑप्टिमाइज़ेशन
  • चार्जिंग स्लॉट/स्टेशन लोड बैलेंसिंग
  • हॉटस्पॉट प्रेडिक्शन (कहाँ मांग बढ़ेगी)

अगर Also भविष्य में Rivian के रिटेल फुटप्रिंट/सेल्स स्पेस का चयनित उपयोग करती है, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि वे सर्विसिंग, सब्सक्रिप्शन, और फ्लीट डिप्लॉयमेंट जैसे मॉडलों को तेज़ी से स्केल करना चाहते हैं—और ये सब AI/डेटा के बिना महंगे पड़ते हैं।

वर्टिकल इंटीग्रेशन + AI: क्यों “इन-हाउस” बनाना समझदारी है?

जब कंपनी मोटर, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, और सॉफ्टवेयर एक साथ डिज़ाइन करती है, तब AI सिर्फ “फीचर” नहीं रहता—वह प्रोडक्ट की नींव बन जाता है। मेरे अनुभव में ऑटोमोबाइल प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा दिक्कत वहाँ आती है जहाँ हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अलग-अलग रोडमैप पर चलते हैं।

Also का इन-हाउस प्लेटफॉर्म अप्रोच तीन लाभ देता है:

  • डेटा कंसिस्टेंसी: सेंसर, कंट्रोलर, और ऐप से जो डेटा आता है, वह एक भाषा में होता है। AI मॉडल जल्दी स्थिर होते हैं।
  • तेज़ सुधार: OTA अपडेट के जरिए एनर्जी-मैपिंग, ब्रेक-फील, या बैटरी चार्जिंग प्रोफाइल सुधारी जा सकती है।
  • कस्टमर अनुभव: यूज़र को “टेक्नोलॉजी” नहीं, कम झंझट चाहिए—AI का सही उपयोग यही है।

एक लाइन में: छोटे EVs में जीत वही कंपनी पाएगी जो हार्डवेयर को हल्का और सॉफ्टवेयर को समझदार रखे।

भारत में ऐसे छोटे EVs का अवसर: कहाँ से शुरुआत करें?

Also फिलहाल अमेरिका/यूरोप पर फोकस कर रही है, लेकिन उनकी सोच भारत जैसे बाजारों पर भी लागू होती है—शायद और ज्यादा। अगर आप EV स्टार्टअप, फ्लीट ऑपरेटर, या ऑटो OEM साइड पर हैं, तो मैं तीन व्यावहारिक जगहों से शुरुआत सुझाऊँगा:

1) “लोकल ट्रिप रिप्लेसमेंट” को KPI बनाइए

कार्बन बचत का KPI अच्छा लगता है, पर ऑपरेशन में सबसे काम का KPI है:

  • प्रति दिन कितनी कार-माइल्स/किमी आप छोटे EV से बदल रहे हैं?
  • कितने ट्रिप्स 2/3/4 व्हीलर से शिफ्ट हुए?

2) AI-फर्स्ट फीचर्स चुनिए, फीचर-लिस्ट नहीं

छोटे EV में हर सेंसर/कम्प्यूट लागत बढ़ाता है। इसलिए AI फीचर्स को “कम में ज्यादा” तरीके से चुनिए:

  • बैटरी SoH (State of Health) प्रेडिक्शन
  • रेंज प्रेडिक्शन + स्मार्ट रूट सुझाव
  • सेफ्टी अलर्ट्स (ऑब्जेक्ट/डोरिंग/ब्लाइंड-ज़ोन)

3) चार्जिंग को व्यवहार से जोड़िए

लोग चार्जिंग इन्फ्रा से नहीं, रूटीन से चार्ज करते हैं। AI-आधारित ऐप/डैशबोर्ड यूज़र को बताएं:

  • आज रात कितना चार्ज पर्याप्त है
  • किस समय चार्ज करना सस्ता/आसान होगा
  • बैटरी को लंबी उम्र के लिए कैसे चार्ज करें

“सेगमेंट क्रीप” के खिलाफ सबसे ठोस जवाब

EV दुनिया में एक अजीब आदत दिखती है: जैसे ही बैटरी/टेक बेहतर होता है, गाड़ियाँ बड़ी हो जाती हैं। नतीजा—दक्षता का फायदा वजन निगल जाता है। Also का संदेश इस आदत को चुनौती देता है: लोकल मोबिलिटी के लिए सुपर-साइज़िंग जरूरी नहीं है।

Rivian खुद 2026 में R2 (लगभग $45,000) जैसी छोटी SUV ला रही है, और R3/R3X जैसी और कॉम्पैक्ट पेशकशों पर काम कर रही है। मगर Also का दांव उससे भी आगे है—कार जैसी सोच छोड़कर माइक्रो-मोबिलिटी प्लेटफॉर्म बनाना।

यदि 2026 में उनका फ्लैगशिप प्रोडक्ट वादे के मुताबिक आया, तो यह सिर्फ एक नया वाहन नहीं होगा। यह एक टेस्ट होगा कि क्या ग्राहक AI-सहायित, छोटे, ज्यादा दक्ष EVs को “दूसरी गाड़ी” या “पहली पसंद” के रूप में अपनाते हैं।

आप अगर ऑटोमोबाइल/EV टीम में हैं और 2025 के अंत में 2026 रोडमैप बना रहे हैं, तो यह सवाल खुद से पूछिए: क्या आपकी AI रणनीति सिर्फ ड्राइवर असिस्ट तक सीमित है, या आप उसे दक्षता, लागत और उपयोग के मूल डिजाइन में डाल रहे हैं?

अगला साल छोटे EVs के लिए निर्णायक हो सकता है—और AI तय करेगा कि यह श्रेणी “निच” रहेगी या “नॉर्म” बन जाएगी।

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