AI कॉकपिट: IVI+ADAS एक कंट्रोलर में क्यों अहम है

ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन में AIBy 3L3C

AI कॉकपिट में IVI+ADAS का एक कंट्रोलर पर आना SDV और EV रोडमैप बदल रहा है। जानिए फायदे, रिस्क और अपनाने की चेकलिस्ट।

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AI कॉकपिट: IVI+ADAS एक कंट्रोलर में क्यों अहम है

कार इंडस्ट्री में एक बदलाव चुपचाप तेज़ी से हो रहा है: डिस्प्ले, कैमरा, रडार, और AI—सबका डेटा अब अलग-अलग “डिब्बों” में नहीं रहना चाहता। 18/12/2025 को सामने आई खबर के मुताबिक, aiMotive और LG CES 2026 (जनवरी) में एक इंटीग्रेटेड IVI + ADAS कंट्रोलर दिखाने जा रहे हैं, जिसे वे HPC Lite प्लेटफॉर्म कह रहे हैं। इसका मतलब सीधा है—इन्फोटेनमेंट (IVI) और ड्राइवर-सेफ्टी फीचर्स (ADAS) के लिए अलग-अलग ECU लगाने की बजाय एक ही हाई-परफॉर्मेंस कंट्रोल यूनिट में कई काम एक साथ।

इस पोस्ट को मैं हमारी “ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन में AI” सीरीज़ के नजरिये से देख रहा हूँ: AI अब सिर्फ ऑटोनॉमस ड्राइविंग तक सीमित नहीं है—वह कॉकपिट UX, सेफ्टी, लागत, और अपग्रेड-एबिलिटी (SDV) का केंद्र बन रहा है। EVs में तो यह और भी जरूरी है, क्योंकि हर वॉट, हर सेंसर, और हर कंप्यूट साइकिल की कीमत होती है।

IVI और ADAS का एक साथ आना इतना बड़ा संकेत क्यों है?

सीधा जवाब: क्योंकि इससे कार का इलेक्ट्रॉनिक आर्किटेक्चर सरल होता है, डेटा शेयरिंग तेज़ होती है, और फीचर रोलआउट (OTA/SDV) ज्यादा व्यावहारिक बनता है।

आज बहुत-सी गाड़ियों में IVI अलग कंप्यूटर पर चलता है और ADAS अलग ECU/डोमेन पर। नतीजा:

  • हार्डवेयर ज्यादा, वायरिंग ज्यादा, वजन ज्यादा
  • सॉफ्टवेयर अपडेट/डायग्नोसिस जटिल
  • “कॉकपिट” और “सेफ्टी” डेटा एक-दूसरे से सही तरीके से बात नहीं कर पाते

इंटीग्रेटेड कंट्रोलर में दोनों डोमेन एक ही जगह पर होने से “डोमेन-टू-डोमेन” कम्युनिकेशन तेज़ हो सकता है। उदाहरण के लिए:

  • ADAS को सड़क/ट्रैफिक की जो समझ बनती है, वह ड्राइवर डिस्प्ले पर ज्यादा स्पष्ट तरीके से दिखाई जा सकती है।
  • नेविगेशन/रूट डेटा और ड्राइविंग असिस्ट एक साथ सोच सकते हैं—कहाँ स्पीड कम करनी है, कहाँ लेन पोजिशनिंग मददगार होगी।

यह वही दिशा है जहाँ Software-Defined Vehicle (SDV) जा रहा है: हार्डवेयर कम, सॉफ्टवेयर ज्यादा सक्षम—और AI बीच में बैठकर फैसले बेहतर करता है।

aiMotive + LG का प्लेटफॉर्म क्या-क्या करता है (और क्या अलग है)?

सीधा जवाब: यह प्लेटफॉर्म एक ECU में IVI + ADAS जोड़ता है, और aiMotive का aiDrive Level 2+ हाईवे/सेकेंडरी रोड पर navigation-assisted driving सपोर्ट करता है।

RSS के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म की खास बातें:

  • aiDrive सॉफ्टवेयर: Level 2+ ऑटोमेटेड navigation-assisted ड्राइविंग
  • सेंसर सेटअप: मल्टी-कैमरा + मल्टी-रडार
  • HD मैप्स के बिना काम करने पर जोर
  • फीचर्स:
    • ट्रैफिक लाइट रिकग्निशन
    • स्टॉप लाइन डिटेक्शन
    • हाईवे स्पीड लिमिट के आधार पर ऑटोनॉमस स्पीड एडजस्टमेंट
  • HMI/डिस्प्ले: इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर + सेंटर इंफो डिस्प्ले
  • LG का विज़ुअल: ADAS Confident View—3D/2D ग्राफिक्स में आसपास की स्थिति

“HD मैप्स के बिना” का व्यावहारिक मतलब

सीधा जवाब: यह स्केलेबिलिटी बढ़ाता है, लेकिन AI को ऑन-बोर्ड परसेप्शन और रूल-हैंडलिंग ज्यादा मजबूत करनी पड़ती है।

भारत जैसे बाजारों में (और कई उभरते बाजारों में), HD मैप कवरेज, लेन-लेवल डेटा, रोड-वर्क अपडेट, और एनफोर्समेंट-साइनिंग का स्टैंडर्डाइजेशन एक जैसा नहीं होता। ऐसे में मैप-हेवी सिस्टम अक्सर सीमित हो जाते हैं।

मैप के बिना सिस्टम का भरोसा सेंसर फ्यूज़न और रीयल-टाइम परसेप्शन पर टिका रहता है:

  • कैमरा सिग्नल/लेन/लाइट पढ़ता है
  • रडार दूरी/वेग/ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग में मदद करता है
  • AI इन सबको जोड़कर “क्या हो रहा है” का निर्णय बनाता है

मैं यहाँ एक राय साफ रखना चाहूँगा: मैप-लेस दृष्टिकोण अच्छी दिशा है, लेकिन ‘मैप-फ्री’ को ‘मैप-इंडिपेंडेंट’ समझना चाहिए। कई OEM अंत में हाइब्रिड मॉडल अपनाते हैं—जहाँ उपलब्ध होने पर मैप मदद करता है, लेकिन सिस्टम उसके बिना भी सुरक्षित तरीके से काम कर सके।

एक ECU में सब कुछ: फायदे, लेकिन रिस्क भी

सीधा जवाब: फायदा—कम हार्डवेयर, कम लागत, बेहतर डेटा शेयरिंग। रिस्क—सेफ्टी-क्रिटिकल और कंज्यूमर ऐप्स का सह-अस्तित्व, थर्मल/लोड मैनेजमेंट, और साइबर सुरक्षा।

1) लागत और हार्डवेयर जटिलता कम

एकीकृत कंट्रोलर से:

  • ECU काउंट घट सकता है
  • हार्नेस/कनेक्टर्स घटते हैं
  • असेंबली और सप्लाई-चेन सरल होती है

EV के संदर्भ में यह खास है, क्योंकि वजन/पैकेजिंग का सीधा असर रेंज और कॉस्ट पर पड़ता है।

2) बेहतर HMI = बेहतर भरोसा

ADAS फीचर्स तभी अच्छे माने जाते हैं जब ड्राइवर को स्पष्ट लगे कि:

  • सिस्टम क्या “देख” रहा है
  • सिस्टम क्या करने जा रहा है
  • सिस्टम की सीमाएँ क्या हैं

LG का 3D/2D surround visualization इसी पर फोकस करता है। यह सिर्फ “सुंदर ग्राफिक्स” नहीं—यह ड्राइवर ट्रस्ट और सेफ्टी का हिस्सा है।

3) रिस्क: सेफ्टी और इन्फोटेनमेंट का साथ रहना

जब एक ही कंप्यूट यूनिट पर:

  • वीडियो/म्यूज़िक/ऐप्स (IVI)
  • और ब्रेकिंग/स्टियरिंग निर्णयों को सपोर्ट करने वाला स्टैक (ADAS)

…साथ चले, तो सिस्टम आर्किटेक्चर को हार्ड आइसोलेशन चाहिए। व्यवहार में इसका मतलब हो सकता है:

  • सेफ्टी-क्रिटिकल पार्ट के लिए अलग रियल-टाइम शेड्यूलिंग
  • कंटेनर/हाइपरवाइज़र आधारित डोमेन आइसोलेशन
  • ISO 26262 सेफ्टी केस, फेल-ऑपरेशनल/फेल-सेफ डिज़ाइन

साथ ही, थर्मल मैनेजमेंट भी बड़ा मुद्दा है—क्योंकि डिस्प्ले/ग्राफिक्स और AI परसेप्शन दोनों GPU/NPU पर लोड बढ़ाते हैं।

EV और SDV रोडमैप में इसका मतलब क्या है?

सीधा जवाब: यह दिखाता है कि अगली पीढ़ी की EVs में “AI कॉकपिट + ADAS” एक ही प्लेटफॉर्म पर बैठकर फीचर्स तेजी से जोड़ेंगे—और OEM का फोकस हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर पर होगा।

2025 के आखिर में SDV चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि:

  • ग्राहक OTA अपडेट की उम्मीद करते हैं (फोन जैसी)
  • रेगुलेशन और सेफ्टी फीचर्स तेजी से बदलते हैं
  • कंप्यूट सेंट्रलाइजेशन से प्लेटफॉर्म शेयरिंग संभव होती है

aiMotive और LG की घोषणा में “SDV को सपोर्ट” वाली लाइन महत्वपूर्ण है। इसका संकेत:

  • OEM एक ऐसा बेस कंप्यूट प्लेटफॉर्म चाहते हैं जिसे कई मॉडल्स में reuse किया जा सके
  • फीचर्स सॉफ्टवेयर के जरिए अनलॉक/एन्हांस हों
  • ड्राइवर असिस्ट, नेविगेशन, डिस्प्ले—सब एक कॉमन डेटा लेयर से चलें

मेरे अनुभव में, SDV का असली फायदा “एक फीचर” नहीं होता। फायदा होता है फीचर डिलीवरी की स्पीड—आज जो सेफ्टी सुधार आप 18 महीनों में देते थे, वही 6-8 महीनों में संभव हो जाता है, बशर्ते आर्किटेक्चर तैयार हो।

कार खरीदारों के लिए यह बदलाव कैसे महसूस होगा?

सीधा जवाब: ज्यादा consistent ADAS अनुभव, बेहतर स्क्रीन पर स्पष्ट चेतावनियाँ, और अपडेट के जरिए फीचर्स का बढ़ना—लेकिन साथ में यह सवाल भी कि OEM पारदर्शिता और सुरक्षा कैसे बनाएगा।

आपको ये चीजें ज्यादा दिखेंगी:

  1. डिस्प्ले पर ADAS की “समझ”: लेन, वाहन, पैदल यात्री, सिग्नल—सबका विज़ुअल फीडबैक
  2. नेविगेशन-अवेयर ड्राइविंग: हाईवे पर स्पीड लिमिट/रूट संदर्भित निर्णय
  3. OTA से सुधार: कैमरा परसेप्शन, HMI भाषा, अलर्ट ट्यूनिंग का अपडेट

लेकिन खरीदार के तौर पर दो सवाल पूछना सही रहेगा:

  • सिस्टम की सीमाएँ क्या हैं? (खासकर Level 2+ में)
  • डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा के उपाय क्या हैं?

OEMs और ऑटोमोटिव टीम्स के लिए व्यावहारिक चेकलिस्ट

सीधा जवाब: इंटीग्रेशन अपनाने से पहले सेफ्टी आइसोलेशन, कंप्यूट बजटिंग, और HMI वैलिडेशन पर सख्त योजना बनाइए।

यदि आप OEM/टियर-1/फ्लीट या EV स्टार्टअप टीम में हैं, तो यह 7-पॉइंट चेकलिस्ट काम आएगी:

  1. Compute budget: ADAS worst-case + IVI peak लोड साथ में
  2. Thermal design: गर्मियों/ट्रैफिक जाम/लंबे हाईवे केस में थ्रॉटलिंग न हो
  3. Safety partitioning: hypervisor/RTOS आइसोलेशन, सेफ्टी मॉनिटर
  4. Sensor fusion latency: कैमरा-रडार टाइम-सिंक और एंड-टू-एंड लेटेंसी मापें
  5. HMI validation: अलर्ट फटीग, गलत कॉन्फिडेंस संकेत, डिस्ट्रैक्शन टेस्ट
  6. Cybersecurity: OTA साइनिंग, secure boot, intrusion detection
  7. Operational Design Domain (ODD): Level 2+ का ODD साफ लिखें, मार्केटिंग से अलग

याद रखने लायक एक लाइन: “ADAS की परफॉर्मेंस उतनी ही अच्छी है, जितना साफ उसका HMI ड्राइवर को सच बताता है।”

आगे क्या देखना चाहिए: CES 2026 के बाद की तस्वीर

सीधा जवाब: असली परीक्षा डेमो नहीं, बल्कि OEM प्रोग्राम्स में इसका उत्पादन-स्तर (SOP) अपनाया जाना होगा।

CES में अक्सर कॉन्सेप्ट और रोडमैप दिखते हैं। असली संकेत ये होंगे:

  • कौन-सा OEM इसे अपने अगले प्लेटफॉर्म में लेता है
  • Level 2+ फीचर्स किन बाजारों में, किन शर्तों के साथ आते हैं
  • क्या यह प्लेटफॉर्म “एक मॉडल” तक सीमित रहेगा या मल्टी-मॉडल स्केल पर जाएगा

और हमारी “ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन में AI” सीरीज़ के हिसाब से, मैं इसे एक स्पष्ट ट्रेंड मानता हूँ: AI अब वाहन के अंदर अलग-अलग सिस्टम्स का ‘गोंद’ बन रहा है—जो सेफ्टी, UX और लागत को एक साथ जोड़ता है।

अगर आप अपने EV/ऑटोमोटिव प्रोडक्ट रोडमैप में AI कॉकपिट, ADAS, या SDV आर्किटेक्चर पर काम कर रहे हैं, तो यह सही समय है कि आप केंद्रीकृत कंप्यूट + स्पष्ट HMI + सुरक्षित OTA को एक साथ प्लान करें—अलग-अलग नहीं।

आखिरी सवाल आपके लिए: आपकी अगली गाड़ी “बड़े स्क्रीन” से याद रहेगी, या “सही समय पर सही मदद” से?

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