AI से प्रोग्रामेटिक पारदर्शिता: OpenPath से सबक

मीडिया और मनोरंजन में AIBy 3L3C

प्रोग्रामेटिक में पारदर्शिता क्यों टूट रही है और AI से कॉस्ट-ऑडिट, ETR मॉडलिंग व SPO स्कोरकार्ड बनाकर भरोसा कैसे लौटाएँ।

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AI से प्रोग्रामेटिक पारदर्शिता: OpenPath से सबक

दिसंबर के इस आख़िरी हफ्ते में, जब कई ब्रांड “साल का हिसाब” जोड़ रहे होते हैं, एक सवाल फिर तेज़ हो गया है—हम अपने मीडिया बजट का हर रुपया कहाँ, किसे और किस वजह से दे रहे हैं? अमेरिका में कई मीडिया बायर्स ने The Trade Desk के OpenPath पर खर्च कम/पॉज़ किया है, वजह एक ही: कॉस्ट और फीस की स्पष्टता

यह सिर्फ एक प्लेटफ़ॉर्म की कहानी नहीं है। यह पूरे प्रोग्रामेटिक इकोसिस्टम का पुराना दर्द है—कितने “हॉप्स”, कितने फीस-लेयर्स, और किस स्तर पर प्रीमियम जुड़ रहा है—यह समझना मुश्किल हो जाता है। और यही वह जगह है जहाँ AI (ख़ासकर analytics + anomaly detection + explainability) विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के लिए व्यावहारिक समाधान बन सकता है।

यह पोस्ट हमारी “मीडिया और मनोरंजन में AI” सीरीज़ के संदर्भ में एक केस स्टडी है: OpenPath जैसे डायरेक्ट सप्लाई पाथ पारदर्शिता का वादा करते हैं, लेकिन अगर कॉस्ट-मैकेनिक्स धुंधला रहे तो भरोसा टूटता है। मैं यहाँ बताऊँगा कि समस्या क्या है, एजेंसियाँ क्यों सतर्क हैं, और AI आधारित टूलिंग से पारदर्शिता को मापने योग्य तरीके से कैसे बेहतर किया जा सकता है।

OpenPath विवाद का असली मुद्दा: “लागत” नहीं, “निश्चितता”

सीधा जवाब: कई एजेंसियाँ OpenPath को महँगा मानकर नहीं, बल्कि “समझने में कठिन” मानकर पीछे हट रही हैं।

OpenPath (लॉन्च: 2022) को The Trade Desk ने एक क्लीनर, डायरेक्ट प्रोग्रामेटिक पाइपलाइन के रूप में पोज़िशन किया—जहाँ विज्ञापनदाता हजारों पब्लिशर्स के साथ अधिक सीधे तरीके से इन्वेंट्री खरीद सकें, खासकर CTV इन्वेंट्री जैसी डिमांड-हैवी कैटेगरी में। कागज़ पर विज्ञापनदाता/एजेंसी के लिए OpenPath “फ्री” है, लेकिन:

  • The Trade Desk के DSP/टेक फीस तो रहती हैं
  • पब्लिशर तरफ़ से OpenPath उपयोग पर एक प्रतिशत-आधारित फीस (रिपोर्टेड तौर पर ~5%) लग सकती है

दिक्कत यह है कि एजेंसियाँ क्लाइंट को सिर्फ “कुल खर्च” नहीं बतातीं—उन्हें बताना होता है:

  • किस इन्वेंट्री के लिए कितना
  • कौन-कौन सी फीस किस लेयर पर
  • क्या प्राइस में प्रीमियम जुड़ा, और क्यों

कई बायर्स ने कहा कि विज़िबिलिटी कम है। एक एजेंसी एक अनुमान में OpenPath ट्रांजैक्शन पर 10–15% प्रीमियम जैसी बात भी बताती है। दिलचस्प बात: कुछ बड़े होल्डिंग ग्रुप्स ने यह भी कहा कि अनुमानित कॉस्ट प्रतिस्पर्धी लगती है—पर कन्फर्मेशन नहीं है। और मीडिया में “अनिश्चितता” अक्सर “जोखिम” बन जाती है।

एक लाइन में: अगर आप क्लाइंट की आँखों में देखकर “आपने ठीक-ठीक किस चीज़ के लिए भुगतान किया” नहीं समझा सकते, तो आप उस सप्लाई पाथ को कम प्राथमिकता देंगे।

“क्लीन सप्लाई” का साइड इफेक्ट: मार्जिन और पोस्ट-ऑक्शन इकॉनॉमिक्स

सीधा जवाब: जब रास्ता छोटा होता है, तो फीस छिपाने की गुंजाइश कम होती है—और यही कुछ एजेंसियों के लिए तनाव का कारण भी बनता है।

प्रोग्रामेटिक इतिहास में कई बार “बीच के हाथ” (इंटरमीडियरीज़) केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि कुछ मामलों में पोस्ट-ऑक्शन एडजस्टमेंट्स/गिवबैक जैसी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का भी हिस्सा रहे हैं। OpenPath जैसे “कम हॉप्स” मॉडल में:

  • इंटरमीडियरी कम ⇒ कई पारंपरिक एडजस्टमेंट्स की जगह घट सकती है
  • परिणामस्वरूप, एजेंसी मार्जिन प्रोटेक्शन के पुराने तरीके सीमित हो सकते हैं

मैं इसे “अच्छा/बुरा” के रूप में नहीं देखता। यह बस एक वास्तविकता है कि कॉस्ट ट्रांसपेरेंसी बढ़ने पर हर पक्ष को अपना बिज़नेस मॉडल अधिक साफ़-सुथरा रखना पड़ता है।

और 2026 की प्लानिंग में यह और बड़ा होगा—क्योंकि CTV, रिटेल मीडिया और क्रिएटर-ड्रिवन इन्वेंट्री में मल्टी-प्लेटफ़ॉर्म खरीद बढ़ रही है। जितनी जटिलता बढ़ेगी, उतनी पारदर्शिता की माँग भी।

AI यहाँ क्या “ठीक” कर सकता है: पारदर्शिता को डेटा-प्रॉडक्ट बनाइए

सीधा जवाब: AI किसी प्लेटफ़ॉर्म को “ज्यादा ईमानदार” नहीं बनाता; AI आपके लिए कॉस्ट को “डिकोड” करके ऑडिट-रेडी बनाता है।

OpenPath केस से सीख यह है कि पारदर्शिता एक फीलिंग नहीं, एक डैशबोर्ड होनी चाहिए। नीचे AI आधारित एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क है जिसे विज्ञापनदाता/एजेंसियाँ लागू कर सकती हैं—चाहे वे OpenPath उपयोग करें या कोई भी SSP/DSP पाथ।

1) “Effective Take Rate” मॉडल: हर इम्प्रेशन का वास्तविक कट

AI/ML से आप हर ट्रांजैक्शन पर Effective Take Rate (ETR) अनुमानित कर सकते हैं:

  • ETR = (Total Media Spend - Estimated Publisher Net) / Total Media Spend

चुनौती यह है कि publisher net हमेशा सीधे नहीं दिखता। AI यहाँ मदद करता है:

  • लॉग-लेवल डेटा (bid, win, clearing price, floor, deal type) से नेट प्राइस का प्रॉक्सी बनाना
  • पब्लिशर/इन्वेंट्री क्लस्टर्स के हिसाब से “नॉर्मल रेंज” सीखना

आउटपुट: आपको यह पता चलता है कि कौन-से पाथ/इन्वेंट्री में कट असामान्य है, भले फीस लाइन-आइटम में न दिखे।

2) Anomaly Detection: 10–15% प्रीमियम “कब” और “कहाँ”

अगर किसी एजेंसी को लगता है कि कुछ ट्रांजैक्शन पर 10–15% प्रीमियम है, तो AI इस दावे को टेस्टेबल बनाता है:

  • सप्ताह-दर-सप्ताह ETR में स्पाइक
  • किसी खास डोमेन/ऐप/CTV चैनल पर लगातार हाई प्रीमियम
  • किसी खास डील टाइप (PMP बनाम ओपन ऑक्शन) में पैटर्न

यहाँ साधारण नियम-आधारित अलर्ट पर्याप्त नहीं होते, क्योंकि प्रोग्रामेटिक में सीज़नैलिटी (जैसे दिसंबर में CPM बढ़ना) स्वाभाविक है। ML आधारित baseline modeling आपको “सीज़नल नॉर्मल” और “वास्तविक विसंगति” अलग करने देता है।

3) Explainable AI: CFO-फ्रेंडली कॉस्ट स्टोरी

ट्रांसपेरेंसी की लड़ाई अक्सर टेक टीम नहीं, फाइनेंस और प्रोक्योरमेंट के सामने हारती/जीतती है। इसलिए “ब्लैक बॉक्स स्कोर” नहीं, स्पष्ट कारण चाहिए।

Explainable AI का लक्ष्य:

  • “कॉस्ट क्यों बढ़ी?” के 3–5 प्रमुख कारण
  • कारणों को फीचर-लेवल भाषा में बताना (floor price change, competition density, deal priority, time-of-day)
  • हर कारण के साथ estimated impact %

एक वाक्य जो रिपोर्ट में काम करता है:

“इस सप्ताह CTV इन्वेंट्री X पर ETR +6.2% बढ़ा, क्योंकि floor prices +9% और win-rate -3% हुआ; प्लेटफ़ॉर्म फीस स्थिर रही।”

4) Supply Path Optimization (SPO) को “AI-सहायक” बनाइए

SPO अक्सर एक स्प्रेडशीट प्रोजेक्ट बनकर रह जाता है। AI इसे रोज़मर्रा का ऑपरेशन बना सकता है:

  • पाथ-वार Price × Quality × Transparency Score
  • ब्रांड-सेफ्टी और फ़्रॉड सिग्नल को कॉस्ट के साथ जोड़ना
  • “यदि OpenPath हटाएँ तो क्या होगा?” जैसे what-if simulation

यह खासकर मीडिया और मनोरंजन ब्रांड्स के लिए उपयोगी है, जहाँ:

  • बड़े पैमाने पर वीडियो/CTV खरीद होती है
  • प्रीमियम इन्वेंट्री की मांग अधिक होती है
  • सीज़नल रिलीज़/ट्रेलर/इवेंट्स के दौरान CPM तेज़ी से बदलते हैं

30 दिनों में लागू होने वाला पारदर्शिता प्लेबुक (एजेंसी/ब्रांड टीम)

सीधा जवाब: आपको प्लेटफ़ॉर्म बदलने से पहले मापने की भाषा बदलनी चाहिए।

यह एक व्यावहारिक 4-स्टेप प्लान है जिसे मैं किसी भी मध्यम-बड़े मीडिया बजट वाली टीम के लिए सुझाऊँगा:

  1. डेटा इन्वेंट्री बनाइए (दिन 1–5)

    • DSP लॉग्स, SSP/डील रिपोर्ट, ad server डेटा, brand-safety/fraud सिग्नल
    • एक common key तय करें: domain/app, placement, deal id, timestamp
  2. ETR बेसलाइन सेट कीजिए (दिन 6–12)

    • पिछले 8–12 हफ्तों का baseline
    • CTV और डिस्प्ले को अलग रखें (क्योंकि मार्केट डायनेमिक्स अलग हैं)
  3. Anomaly Alerts + रूट कॉज़ (दिन 13–22)

    • ETR, floor, win-rate, viewability, IVT के लिए thresholds नहीं—model-based alerts
    • हर अलर्ट के साथ “कारण-रिपोर्ट”
  4. SPO स्कोरकार्ड और निर्णय नियम (दिन 23–30)

    • “कब OpenPath/किसी भी path को प्राथमिकता दें” स्पष्ट करें
    • उदाहरण नियम: Transparency score < 70/100 और ETR volatility > X ⇒ spend cap

यह प्लेबुक “ट्रांसपेरेंसी” को मीटिंग का विषय नहीं रहने देता—यह ऑपरेशनल मीट्रिक बन जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (टीम्स यही पूछती हैं)

क्या OpenPath जैसे डायरेक्ट पाथ हमेशा बेहतर होते हैं?

नहीं। बेहतर तब होते हैं जब कॉस्ट + क्वालिटी + रिपोर्टिंग एक साथ स्पष्ट हों। “कम हॉप्स” अपने-आप में गारंटी नहीं है।

AI लगाने का मतलब क्या मुझे नया DSP/SSP खरीदना होगा?

जरूरी नहीं। कई टीमें पहले चरण में डेटा वेयरहाउस + BI + ML लेयर जोड़कर शुरुआत करती हैं। प्लेटफ़ॉर्म बदलाव बाद में आता है।

अगर डेटा ही पूरा न मिले तो?

यही तो पॉइंट है: AI आपको “डेटा गैप” भी दिखाता है। आप vendor से न्यूनतम आवश्यक फ़ील्ड्स (जैसे clearing price, deal metadata, fee taxonomies) के लिए बातचीत बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

आगे का रास्ता: 2026 में “परफॉर्मेंस बनाम पारदर्शिता” झूठा विकल्प नहीं रहेगा

प्रोग्रामेटिक में लंबे समय से एक गलत धारणा रही है—या तो सस्ता/तेज़ परफॉर्मेंस, या फिर पारदर्शिता और नियंत्रण। OpenPath पर उठी बहस बताती है कि बाजार अब दोनों चाहता है। और यह मांग जायज़ है।

“मीडिया और मनोरंजन में AI” के संदर्भ में मेरे हिसाब से अगला बड़ा बदलाव यही है: AI आधारित ऑडियंस विश्लेषण और कंटेंट सिफारिश के साथ-साथ, मीडिया बाइंग की पारदर्शिता भी AI-सहायक स्टैंडर्ड बन जाएगी। जिस टीम के पास ऑडिट-रेडी कॉस्ट इंटेलिजेंस होगी, वह CTV, प्रीमियम वीडियो और ब्रांड पार्टनरशिप में बेहतर शर्तें तय करेगी।

अगर आप 2026 की प्लानिंग में हैं, तो एक सीधा कदम उठाइए: अपने मीडिया डैशबोर्ड में “CPM/CPA” के साथ Transparency Metrics भी जोड़िए—ETR, fee clarity score, volatility, path hops।

और अब सवाल यह नहीं है कि “AI का उपयोग करें या नहीं”; सवाल यह है—क्या आपका AI आपको कॉस्ट की कहानी साफ़-साफ़ सुना पा रहा है?

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