AI स्पॉट स्प्रेइंग: खरपतवार नियंत्रण में नई समझ

कृषि और स्मार्ट खेती में AIBy 3L3C

AI स्पॉट स्प्रेइंग हर पौधे के स्तर पर खरपतवार पहचानकर सिर्फ वहीं छिड़काव करती है। जानें कैसे यह लागत, श्रम और रसायन दबाव घटाकर स्मार्ट खेती को मजबूत बनाती है।

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AI स्पॉट स्प्रेइंग: खरपतवार नियंत्रण में नई समझ

खरपतवार नियंत्रण में सबसे बड़ा नुकसान अक्सर “दवा ज्यादा, असर कम” वाला होता है। एक ही खेत में कुछ जगह खरपतवार का दबाव बहुत ज्यादा होता है, तो कई जगह नाममात्र। फिर भी प्रचलित तरीका पूरे खेत में एक जैसा छिड़काव कर देता है—जिसका नतीजा खर्च बढ़ना, मजदूरी बढ़ना और रसायन का अनावश्यक इस्तेमाल होता है।

इसी पृष्ठभूमि में 12/01/2025 को एक खबर आई: Ecorobotix और Oregon State University (OSU) ने घास-बीज (grass seed) उत्पादन में plant-by-plant यानी हर पौधे के स्तर पर AI आधारित खरपतवार नियंत्रण को वास्तविक खेत परिस्थितियों में परखने के लिए बहु-वर्षीय अध्ययन शुरू किया है। यह सिर्फ एक मशीन की कहानी नहीं है। यह स्मार्ट खेती के उस विचार का ठोस उदाहरण है जहाँ कैमरा, कंप्यूटिंग और कृषि-विज्ञान मिलकर खेत में “जहाँ ज़रूरत, वहीं उपचार” को संभव बनाते हैं।

इस पोस्ट को मैं हमारी श्रृंखला “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” के संदर्भ में लिख रहा/रही हूँ, क्योंकि खरपतवार नियंत्रण अक्सर फसल निगरानी, उपज संरक्षण और लागत प्रबंधन—इन तीनों का केंद्र होता है।

OSU–Ecorobotix अध्ययन इतना अहम क्यों है?

सीधा जवाब: क्योंकि यह AI को ‘डेमो’ से निकालकर ‘फील्ड-प्रूफ’ करने वाला काम है। AI आधारित कृषि उपकरणों की सबसे बड़ी परीक्षा लैब में नहीं, खेत में होती है—जहाँ मिट्टी, रोशनी, फसल की घनता, नमी और मिश्रित खरपतवार की वजह से हर दिन डेटा बदलता रहता है।

OSU में Dr. Pete Berry की टीम का फोकस Kentucky bluegrass और tall fescue जैसी घास-बीज फसलों पर है—जो Oregon की वैश्विक घास-बीज इंडस्ट्री की रीढ़ मानी जाती हैं। ऐसी फसलों में समस्या ये होती है कि:

  • बीज शुद्धता (seed purity) बहुत सख्ती से मापी जाती है
  • कुछ खरपतवार (जैसे poa annua और Italian ryegrass) पहचान और नियंत्रण में मुश्किल होते हैं
  • बार-बार छिड़काव से हर्बिसाइड रेसिस्टेंस (प्रतिरोध) बढ़ता है

यह अध्ययन इसलिए भी उपयोगी है क्योंकि यह केवल “रसायन कम” पर नहीं, दक्षता, चयनात्मकता (selectivity) और कृषि-लाभ—तीनों पर मापे जा सकने वाले परिणाम निकालने की कोशिश करता है।

Plant-by-Plant AI स्प्रेइंग: काम कैसे करता है?

सीधा जवाब: कैमरे हर फ्रेम में पौधों को देखते हैं, AI तय करता है कि कौन सा पौधा खरपतवार है, और नोज़ल उसी बिंदु पर बहुत छोटा स्पॉट स्प्रे करता है।

इस प्रोजेक्ट में जिस मशीन का इस्तेमाल बताया गया है, वह है ARA Ultra High Precision (UHP) Sprayer। खबर के अनुसार इसकी कुछ व्यावहारिक खासियतें:

  • 20-फुट चौड़ा बूम
  • लगभग 4.5 mph की ऑपरेटिंग स्पीड
  • 2.4 x 2.4 इंच जितने छोटे टारगेट की पहचान और स्प्रे क्षमता
  • कैमरा + कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म से problem weeds का चयनात्मक उपचार

यहाँ “plant-by-plant” का मतलब सिर्फ तकनीकी शब्द नहीं है। यह खेती के निर्णय लेने के तरीके में बदलाव है:

पूरे खेत को एक जैसी समस्या मानने के बजाय, खेत को लाखों छोटे निर्णयों में बाँट देना।

स्पॉट स्प्रेइंग बनाम ब्रॉडकास्ट स्प्रेइंग (सरल तुलना)

  • ब्रॉडकास्ट: पूरे खेत में समान डोज़ → खर्च और रसायन ज्यादा, गैर-ज़रूरी छिड़काव ज्यादा
  • स्पॉट/टारगेटेड: सिर्फ खरपतवार पर उपचार → रसायन कम, चुनिंदा नियंत्रण, डेटा बनता है

खबर में कंपनी ने दावा किया है कि यह प्रणाली इनपुट उपयोग 95% तक घटाने में मदद कर सकती है (फसल/स्थिति पर निर्भर)। व्यावहारिक रूप से देखें तो किसी भी किसान/एग्री-एंटरप्राइज के लिए यह आंकड़ा एक दिशा दिखाता है: सही जगह सही मात्रा

यह स्मार्ट खेती के “फसल निगरानी” हिस्से से कैसे जुड़ता है?

सीधा जवाब: AI स्प्रेयर सिर्फ छिड़काव नहीं करता—वह खेत का विज़ुअल रिकॉर्ड भी बनाता है, जिसे आप निगरानी और निर्णय में बदल सकते हैं।

हमारी “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” श्रृंखला में हम बार-बार इसी बात पर लौटते हैं: AI का असली फायदा तब मिलता है जब वह ऑपरेशन और इंटेलिजेंस दोनों देता है। टारगेटेड स्प्रेइंग में आम तौर पर ये डेटा-बिंदु निकलते हैं:

  • खेत के किन हिस्सों में खरपतवार ज्यादा है (weed pressure map)
  • किस खरपतवार की आवृत्ति बढ़ रही है
  • किस समय/स्टेज पर खरपतवार का फ्लश आ रहा है
  • कौन से हिस्से बार-बार उपचार मांग रहे हैं (resistance risk संकेत)

अगर आप यह डेटा हर सीजन स्टोर करते हैं, तो आप एक बहुत व्यावहारिक चीज़ कर सकते हैं: अगले छिड़काव/निराई को “तारीख आधारित” नहीं, “स्थिति आधारित” बनाना।

भारत के संदर्भ में इसका मतलब क्या निकलेगा?

भारत में घास-बीज उत्पादन Oregon जैसा नहीं है, लेकिन समस्या समान है—खासकर:

  • गेहूं, सरसों, चना, सोयाबीन जैसी फसलों में चौड़ी पत्ती + घास वाले खरपतवार का मिश्रण
  • मजदूरों की कमी (पीक सीजन में)
  • रसायन लागत और नकली/मिश्रित उत्पादों का जोखिम
  • नहर/ट्यूबवेल आधारित सिंचाई में “पैच-टू-पैच” भिन्नता

Plant-by-Plant मॉडल इन चुनौतियों में कम से कम तीन जगह सीधा असर डालता है:

  1. रसायन की बचत: अनावश्यक छिड़काव घटेगा
  2. मजदूरी/समय प्रबंधन: स्प्रे ऑपरेशन तेज और अधिक सटीक
  3. उपज संरक्षण: फसल पर कम स्ट्रेस, कम फाइटोटॉक्सिसिटी जोखिम

खेत में अपनाने से पहले किन 6 बातों की जांच करें?

सीधा जवाब: AI स्प्रेइंग का ROI (return) तभी आता है जब आपके खेत/फसल/वर्कफ़्लो इसके अनुकूल हों। मैंने कई एग्री-टेक अपनाने के मामलों में देखा है—तकनीक अच्छी होती है, लेकिन तैयारी कमजोर होने पर फायदा आधा रह जाता है।

यह “प्री-चेकलिस्ट” मदद करेगी:

  1. खरपतवार की समस्या कितनी पैची है?

    • अगर 70–80% खेत साफ है और कुछ पैच बहुत खराब हैं, स्पॉट स्प्रेइंग का लाभ आम तौर पर ज्यादा दिखता है।
  2. आपका छिड़काव खर्च कितना है?

    • हर्बिसाइड + पानी + डीज़ल/ट्रैक्टर + मजदूरी को जोड़कर प्रति एकड़ वास्तविक लागत निकालें।
  3. आपकी फसल का मूल्य कितना है?

    • हाई-वैल्यू फसल (बीज, सब्ज़ी, मसाला, बागवानी) में चयनात्मकता का लाभ जल्दी दिखाई देता है।
  4. फसल स्टेज और कैनोपी कैसी रहती है?

    • बहुत घनी कैनोपी में विज़न आधारित पहचान चुनौती हो सकती है; सही समय-खिड़की जरूरी है।
  5. डेटा/रिकॉर्डिंग की आदत है?

    • स्प्रे लॉग, खरपतवार मैप, और फील्ड नोट्स रखें। AI का लाभ “सीखते हुए” बढ़ता है।
  6. सर्विस और ऑपरेटर ट्रेनिंग

    • मशीन से ज्यादा महत्वपूर्ण है: ऑपरेटर को कैलिब्रेशन, नोज़ल मेंटेनेंस और फील्ड सेटअप आता हो।

हर्बिसाइड रेसिस्टेंस और टिकाऊ खेती: AI कहाँ मदद करता है?

सीधा जवाब: जब आप हर बार एक ही दवा पूरे खेत में डालते हैं, तो प्रतिरोध बनने की रफ्तार बढ़ती है; टारगेटेड और कम-बार/कम-डोज़ उपचार इस दबाव को घटाता है।

हर्बिसाइड रेसिस्टेंस सिर्फ “वैज्ञानिक” समस्या नहीं है—यह लागत और रिस्क की समस्या है। जब एक खरपतवार समूह किसी दवा से बचना सीख जाता है, किसान के पास विकल्प कम पड़ते हैं:

  • डोज़ बढ़ाना (खर्च + पर्यावरण जोखिम)
  • नई दवा (मंहगी, कभी-कभी उपलब्ध नहीं)
  • ज्यादा निराई/मजदूरी

AI आधारित स्पॉट स्प्रेइंग में दो स्पष्ट फायदे हैं:

  • सेलेक्टिविटी: फसल के पास/बीच के खरपतवार को टारगेट किया जा सकता है
  • कम रसायन दबाव: कुल एक्टिव इंग्रेडिएंट कम

लेकिन मैं एक बात साफ कहूँगा/कहूँगी: यह “दवा से छुटकारा” नहीं है—यह “दवा का अनुशासन” है। और अनुशासन लंबे समय में खेत की सेहत और लागत दोनों बचाता है।

“People also ask”: किसानों के सामान्य सवाल

क्या यह तकनीक छोटे किसानों के लिए भी उपयोगी है?

सीधा जवाब: सीधे खरीद के रूप में शायद नहीं, लेकिन कस्टम-हायरिंग/एफपीओ मॉडल में बहुत संभव है। भारत में मशीनें अक्सर सेवा के रूप में तेजी से अपनाई जाती हैं—ठीक वैसे जैसे हार्वेस्टर या ड्रोन स्प्रे।

क्या ड्रोन स्प्रे और AI स्पॉट स्प्रे एक ही चीज़ हैं?

सीधा जवाब: नहीं। ड्रोन आम तौर पर एरियल छिड़काव करता है; AI स्पॉट स्प्रे पौधे के स्तर पर पहचान करके जमीन से टारगेट करता है। दोनों का उपयोग अलग परिस्थितियों में होता है।

क्या इससे उपज बढ़ेगी?

सीधा जवाब: उपज बढ़ने का रास्ता “उपज बचाने” से बनता है। यानी खरपतवार प्रतिस्पर्धा कम, फसल पर कम स्ट्रेस, और गलत छिड़काव से होने वाली क्षति कम—तो उपज/गुणवत्ता स्थिर रहने की संभावना बढ़ती है।

अब अगला कदम क्या होना चाहिए? (लीड-फोकस्ड, पर व्यावहारिक)

अगर आप स्मार्ट खेती में AI को सिर्फ “टेक ट्रेंड” नहीं, लागत घटाने और निर्णय बेहतर करने के तरीके की तरह देखते हैं, तो AI स्पॉट स्प्रेइंग एक मजबूत उम्मीदवार है—खासकर उन फार्म/एग्री-बिज़नेस के लिए जहाँ खरपतवार नियंत्रण का बिल बड़ा है।

मेरी सलाह: अगले 30 दिनों में एक छोटा, मापने योग्य पायलट डिजाइन करें।

  • 10–20 एकड़ का प्लॉट चुनें (या 2–3 अलग पैच)
  • बेसलाइन निकालें: पिछली बार कितना रसायन/पानी/समय लगा
  • सफलता मेट्रिक्स तय करें: रसायन लीटर/एकड़, मजदूरी घंटे, खरपतवार रिडक्शन, फसल सुरक्षा

और फिर एक सवाल खुद से पूछें: अगर आपका खेत हर पौधे पर अलग फैसला लेने लगे, तो आप खेती को किस तरह चलाएंगे—पुराने तरीके से या डेटा के साथ?


नोट (श्रृंखला संदर्भ): “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” के अगले पोस्ट में हम इसी डेटा-एप्रोच को उपज पूर्वानुमान और मौसम आधारित निर्णय से जोड़कर देखेंगे, ताकि स्मार्ट खेती सिर्फ मशीन नहीं, पूरा सिस्टम बने।

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