Gilboa® फफूंदनाशी साझेदारी से सीखें: AI कैसे रोग-पूर्वानुमान, सटीक छिड़काव और प्रतिरोध प्रबंधन को मजबूत बनाता है।
AI-आधारित रोग प्रबंधन: Gilboa® और स्मार्ट खेती
यूरोप में अनाज (खासकर गेहूं) उगाने वाले किसानों के लिए फफूंद रोग कोई “मौसमी परेशानी” नहीं रहे—यह उपज, गुणवत्ता और लागत तीनों पर एक साथ वार करता है। और जब पुराने फफूंदनाशकों पर नियम सख्त हों, या वर्षों के इस्तेमाल से रोगों में प्रतिरोध (resistance) बढ़ जाए, तब विकल्प सीमित हो जाते हैं। इसी संदर्भ में 18/12/2025 (06:18 AM) की एक बड़ी खबर सामने आई: ADAMA और BASF Agricultural Solutions ने Gilboa® (flumetylsulforim) नामक नई फफूंदनाशी सक्रिय सामग्री पर को-डेवलपमेंट और कमर्शियलाइज़ेशन समझौता किया है।
मुझे इस खबर का सबसे व्यावहारिक अर्थ यही लगता है: नई केमिस्ट्री तभी टिकाऊ लाभ देती है, जब उसका इस्तेमाल “सही समय, सही मात्रा, सही जगह” पर हो। और यही वह जगह है जहां हमारी सीरीज़ “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” सीधे जुड़ती है—क्योंकि AI आधारित सटीक खेती नई दवाओं को “ज्यादा” नहीं, ज्यादा समझदारी से इस्तेमाल करने में मदद करती है।
ADAMA–BASF साझेदारी का मतलब क्या है?
सीधी बात: यह साझेदारी Gilboa® आधारित नए फ़ॉर्मुलेशन को तेज़ी से खेत तक लाने की कोशिश है। खबर के अनुसार:
- BASF, ADAMA के Gilboa® अणु पर आधारित नई फ़ॉर्मुलेशन विकसित और बाज़ार में लाएगा—और ADAMA अपने Gilboa आधारित उत्पाद भी बनाएगा।
- दोनों कंपनियां अपनी-अपनी कीमत, बिक्री और गो-टू-मार्केट रणनीति स्वतंत्र रूप से तय करेंगी।
- योजना (रजिस्ट्रेशन/अनुमोदन के अधीन): ग्रेट ब्रिटेन में 2027 में गेहूं के लिए लॉन्च, और फिर 2029 में व्यापक यूरोपीय लॉन्च।
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोप में कई पुराने सक्रिय पदार्थ चरणबद्ध तरीके से हट रहे हैं। ऐसे समय में नई “mode of action” वाली केमिस्ट्री का आना रोग प्रबंधन के लिए राहत है—लेकिन केवल तब, जब किसान इसे प्रतिरोध प्रबंधन के नियमों के साथ इस्तेमाल करें।
Gilboa® अलग कैसे है?
Gilboa® (flumetylsulforim) को खबर में FRAC Group 32 (nucleic acid metabolism) में रखा गया है। इसका मतलब:
- यह एक नई क्रिया-विधि (mode of action) लेकर आता है, जो प्रतिरोध से लड़ने के विकल्प बढ़ाती है।
- अनाज फसलों में लंबे समय तक नियंत्रण (long-lasting control) की दिशा में इसे “प्लेटफ़ॉर्म” की तरह देखा जा रहा है—यानी भविष्य में इसके साथ अलग-अलग मिश्रण/फ़ॉर्मुलेशन संभव हैं।
यहां एक तर्क साफ है: नई केमिस्ट्री का मूल्य तभी टिकेगा जब हम इसे “IPM + डेटा” के साथ जोड़ें। केवल स्प्रे बढ़ाने से फायदा नहीं, उल्टा प्रतिरोध और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।
प्रतिरोध (Resistance) की असली समस्या—और इसका व्यावहारिक हल
प्रतिरोध का पैटर्न अक्सर एक जैसा होता है: बार-बार एक ही समूह की दवा, एक ही समय पर, एक जैसी खुराक—और धीरे-धीरे खेत में रोग “सीख” जाता है। किसान इसे तब नोटिस करता है जब वही स्प्रे, वही ब्रांड, वही मात्रा… और फिर भी रोग रुक नहीं रहा।
“नई दवा” पर्याप्त नहीं—नई आदतें भी चाहिए
Gilboa® जैसी नई तकनीक का फायदा उठाने के लिए खेत-स्तर पर 4 आदतें निर्णायक हैं:
- मिश्रण/रोटेशन रणनीति (FRAC समूह बदलना)
- स्प्रे टाइमिंग का वैज्ञानिक निर्धारण (केवल कैलेंडर पर नहीं)
- कैनोपी कवरेज और नोज़ल कैलिब्रेशन (सिर्फ टंकी की मात्रा नहीं)
- फील्ड-टू-फील्ड रिकॉर्डिंग (क्या, कब, कितना—और परिणाम क्या मिला)
और यही चारों जगह AI और डिजिटल टूल्स वास्तविक असर दिखाते हैं।
AI कैसे Gilboa® जैसी फफूंदनाशी तकनीक को “स्मार्ट” बनाती है?
स्पष्ट उत्तर: AI रोग को “दिखने से पहले” अनुमानित करती है और स्प्रे को “अंधाधुंध” से “लक्षित” बनाती है। इससे दवा का उपयोग कम नहीं भी हो तो बेहतर जगह और सही समय पर होता है—जो प्रतिरोध को धीमा करता है और उपज की रक्षा करता है।
1) रोग जोखिम पूर्वानुमान: मौसम + खेत डेटा + रोग इतिहास
AI मॉडल आमतौर पर इन संकेतों को जोड़कर disease risk score बनाते हैं:
- पिछले 7–14 दिनों की नमी/तापमान/ओस (leaf wetness)
- हवा की गति (स्पोर फैलने की संभावना)
- फसल की अवस्था (growth stage)
- पिछले वर्षों में उसी खेत/इलाके में रोग की आवृत्ति
किसान का फायदा: स्प्रे “कैलेंडर” पर नहीं, जोखिम पर होता है।
2) सटीक छिड़काव (Precision Application): सही मात्रा, सही कवरेज
AI + सेंसर्स/ड्रोन/स्प्रेयर कंट्रोल से ये संभव होता है:
- खेत के अंदर “हॉटस्पॉट” पहचानकर वेरिएबल रेट एप्लिकेशन
- हवा/तापमान के हिसाब से ड्रिफ्ट घटाना
- कैनोपी घनत्व के हिसाब से डोज एडजस्टमेंट
यह खासकर अनाज में काम आता है, जहां पूरे खेत में रोग एक-सा नहीं फैलता।
3) इमेज-आधारित निगरानी: पत्ती के लक्षणों की जल्दी पकड़
कई बार किसान तब पहचानता है जब रोग “सेटल” हो चुका होता है। कैमरा-आधारित AI (मोबाइल, ड्रोन या ट्रैक्टर कैमरा) प्रारंभिक लक्षण पकड़ सकती है—और खेत के मानचित्र पर बताती है कि कौन-सा हिस्सा ज्यादा प्रभावित है।
“AI का असली फायदा यह है कि वह ‘आंख से छूटने वाली शुरुआत’ पकड़ लेती है—और वही शुरुआत सबसे सस्ती होती है।”
4) प्रतिरोध प्रबंधन में निर्णय सहायता (Decision Support)
AI प्लेटफ़ॉर्म किसान को याद दिला सकते हैं:
- इस सीज़न में कौन-सा FRAC ग्रुप कितनी बार इस्तेमाल हुआ
- अगला स्प्रे किस समूह/मिश्रण से होना चाहिए
- कौन-सी खुराक और अंतराल (interval) अधिक सुरक्षित है
यह फीचर सुनने में साधारण लगता है, लेकिन प्रतिरोध को धीमा करने में यही सबसे असरदार कदम है।
खेत पर लागू करने योग्य “AI + फफूंदनाशी” वर्कफ़्लो (प्रैक्टिकल)
स्पष्ट उत्तर: 5 कदम का एक साधारण सिस्टम बनाइए—और पूरे सीज़न उसी पर टिके रहिए।
कदम 1: सीज़न शुरू होने से पहले बेसलाइन बनाएं
- पिछले 2–3 साल के रोग रिकॉर्ड (खेत/गांव स्तर)
- किस तारीख/अवस्था पर ज्यादा हमला हुआ
- किस स्प्रे से क्या परिणाम आया
यदि लिखित रिकॉर्ड नहीं है, तो कम से कम मोबाइल नोट्स में शुरू कर दें।
कदम 2: मौसम-आधारित रोग अलर्ट सेट करें
- नमी + मध्यम तापमान + लंबे समय तक पत्ती गीली = फंगल जोखिम बढ़ता है
- AI या डिजिटल ऐप का अलर्ट आए तो “इंस्टेंट स्प्रे” नहीं—पहले फील्ड स्काउटिंग
कदम 3: स्काउटिंग को मैपिंग से जोड़ें
- 10–15 एकड़ में 5–7 पॉइंट तय करें
- हर पॉइंट की फोटो लें, उसी जगह का रिकॉर्ड रखें
- AI से तुलना करें कि कौन से पॉइंट बार-बार “हॉट” निकल रहे हैं
कदम 4: स्प्रे—लक्षित और कैलिब्रेटेड
- नोज़ल, प्रेशर, पानी की मात्रा और चलने की गति तय करें
- हवा तेज हो तो समय बदलें
- एक ही खेत में हर जगह एक-सी मात्रा जरूरी नहीं—डेटा अगर बताता है कि रोग टुकड़ों में है
कदम 5: पोस्ट-स्प्रे वैलिडेशन
- 5–7 दिन बाद वही पॉइंट फोटो
- क्या रोग रुका? कितना?
- अगली बार टाइमिंग/कवरेज/डोज में क्या सुधार?
यह लूप बन गया तो Gilboa® जैसी नई तकनीक का लाभ “एक बार” नहीं, हर साल बढ़ता है।
2027–2029 की टाइमलाइन से भारत/दक्षिण एशिया क्या सीख सकता है?
स्पष्ट उत्तर: अभी से डेटा-तैयारी और IPM अनुशासन बनाना सबसे बड़ा फायदा देगा, भले ही वही उत्पाद आपके बाजार में बाद में आए।
यूरोप में नियामकीय दबाव और प्रतिरोध की वजह से नई केमिस्ट्री की जरूरत तेज है। भारत में भी—खासकर गेहूं, धान, सब्जियों और बागवानी में—प्रतिरोध एक वास्तविक चुनौती है। नई तकनीकें आती रहेंगी, पर दो बातें स्थायी हैं:
- अंधाधुंध छिड़काव लंबे समय में नुकसान करता है (लागत, प्रतिरोध, अवशेष/रेज़िड्यू जोखिम)
- AI आधारित सटीक खेती छिड़काव को “कम” नहीं तो भी सही बनाती है
यानी आपकी तैयारी आज शुरू होती है: रिकॉर्ड, जोखिम-स्कोर, स्काउटिंग और स्प्रे कैलिब्रेशन।
People Also Ask: किसान और एग्री-प्रोफेशनल्स के सामान्य सवाल
क्या AI से दवा की खपत सच में कम होती है?
कई मामलों में कुल स्प्रे कम होते हैं, और कई मामलों में स्प्रे की संख्या समान रहते हुए भी नुकसान कम होता है—क्योंकि टाइमिंग और कवरेज बेहतर होता है। लक्ष्य “कम स्प्रे” नहीं, कम नुकसान और कम प्रतिरोध है।
नई mode of action वाली दवा आने पर क्या रोटेशन जरूरी है?
हाँ। नई दवा को लगातार उसी तरह इस्तेमाल किया गया तो प्रतिरोध जल्दी आ सकता है। FRAC रोटेशन और मिश्रण रणनीति नई केमिस्ट्री की उम्र बढ़ाती है।
छोटे किसान AI कैसे अपनाएं?
छोटे किसान भी ये 3 चीजें तुरंत कर सकते हैं:
- मोबाइल से स्काउटिंग फोटो और नोट्स
- गांव/एफपीओ स्तर पर साझा मौसम स्टेशन/अलर्ट
- कस्टम हायरिंग सेंटर से कैलिब्रेटेड स्प्रे सेवा
अगले 90 दिनों के लिए एक स्पष्ट एक्शन प्लान (लीड-फोकस्ड)
अगर आप किसान, एफपीओ, एग्री-इनपुट डीलर, या एग्रीटेक टीम में हैं, तो मैं यही सलाह दूंगा—पहले “टूल” नहीं, प्रोसेस सेट करें:
- एक फसल चुनें (गेहूं/धान/टमाटर—जो आपके लिए सबसे क्रिटिकल है)
- 10 खेतों का रोग-रिकॉर्ड टेम्पलेट बनाएं (तारीख, लक्षण, फोटो, स्प्रे, परिणाम)
- मौसम-आधारित रोग-जोखिम अलर्ट शुरू करें
- स्प्रेयर कैलिब्रेशन ड्राइव करें (पानी, नोज़ल, गति)
- 30 दिन बाद रिपोर्ट: कितने अलर्ट, कितनी स्काउटिंग, कितना नुकसान बचा
अगर आप चाहें, मैं आपके लिए फसल-विशिष्ट AI-आधारित रोग प्रबंधन वर्कफ़्लो (टेम्पलेट्स + KPI + डेटा फील्ड्स) तैयार करने की रूपरेखा भी दे सकता हूँ—ताकि आपका सिस्टम अगली फसल से ही चल पड़े।
आगे क्या—AI + नई केमिस्ट्री का “सही गठबंधन”
ADAMA और BASF की Gilboa® साझेदारी एक संकेत है: कृषि में इनोवेशन अब अकेले नहीं चलता। केमिस्ट्री, डिजिटल टूल्स और फील्ड-लेवल अनुशासन—तीनों साथ आएंगे तभी टिकाऊ परिणाम मिलेंगे।
आप “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” सीरीज़ में अगर एक बात याद रखें, तो यह: रोग प्रबंधन का भविष्य ‘ज्यादा स्प्रे’ नहीं, ‘ज्यादा डेटा’ है। अब सवाल यह नहीं कि नई तकनीक आएगी या नहीं—सवाल यह है कि जब आएगी, तब क्या आपका खेत उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए तैयार होगा?