AI-सक्षम CEA वर्टिकल फार्म में Agroz ने जापानी स्ट्रॉबेरी उगाई। जानें यह मॉडल भारतीय स्मार्ट खेती, गुणवत्ता और ROI के लिए क्या संकेत देता है।
AI से उगें जापानी स्ट्रॉबेरी: स्मार्ट खेती का नया मॉडल
17/12/2025 को एक दिलचस्प खबर आई: Agroz ने मलेशिया में अपनी Controlled Environment Agriculture (CEA) वर्टिकल फार्मिंग सेटअप में जापानी स्ट्रॉबेरी उगाने की क्षमता दिखा दी—और इसके पीछे ड्राइविंग फोर्स है AI-पावर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम, AI एजेंट्स, और रोबोटिक्स। यह सिर्फ “विदेशी फल उगाने” की कहानी नहीं है। असली बात यह है कि डेटा, ऑटोमेशन और सटीक नियंत्रण मिलकर खेती को ऐसे ले जा रहे हैं जहाँ फसल का स्वाद, आकार, खुशबू और गुणवत्ता भी मापी जा सकती है—और बार-बार वैसी ही बनाई जा सकती है।
दिसंबर का महीना भारत सहित कई जगहों पर सब्ज़ियों/बेरीज की मांग बढ़ने का होता है—शादी-ब्याह, त्योहारों के बाद के आयोजन, होटल-रेस्तरां और गिफ्टिंग सीज़न में प्रीमियम फ्रूट्स की खपत तेजी से जाती है। ऐसे समय पर यह खबर एक संकेत देती है: उच्च मूल्य वाली फसलें (high-value crops) अब केवल “मौसम और जगह” की कैद में नहीं रहेंगी।
यह पोस्ट हमारी सीरीज़ “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” के संदर्भ में एक व्यावहारिक केस स्टडी है—और मैं इसे उसी नजर से खोलकर रखूँगा: AI ने Agroz को क्या करने लायक बनाया, इसके पीछे सिस्टम कैसे चलता है, और भारत/दक्षिण एशिया के किसान, एग्री-उद्यमी और एग्रीटेक टीमें इससे क्या सीख सकती हैं।
Agroz की स्ट्रॉबेरी सफलता असल में क्या बताती है?
सीधा जवाब: AI + नियंत्रित वातावरण मिलकर खेती को “अनुमान” से निकालकर “इंजीनियरिंग” की तरफ ले जाते हैं। जापानी स्ट्रॉबेरी (जैसे प्रीमियम किस्में) स्वाद और खुशबू के लिए जानी जाती हैं, लेकिन ये नाजुक भी होती हैं—थोड़ा तापमान बिगड़ा, नमी गलत हुई, या पोषण संतुलन डगमगाया तो गुणवत्ता गिर जाती है।
Agroz का मॉडल तीन चीज़ों को जोड़ता है:
- Agroz Groz Wall: वर्टिकल फार्मिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (स्टैक्ड ग्रोइंग)
- Agroz OS: फार्म ऑपरेटिंग सिस्टम जिसमें डिजिटल ऑटोमेशन और AI एजेंट सिस्टम शामिल है
- Agroz Copilot for Farmers: निर्णय सहायता (decision support) और ऑपरेशन गाइडेंस
खबर के मुताबिक, कंपनी 2026 की Q2 के अंत तक मलेशिया में स्थानीय वितरण और फिर दक्षिण-पूर्व एशिया, GCC आदि क्षेत्रों में विस्तार का लक्ष्य रखती है। यह टाइमलाइन बताती है कि टेक्नोलॉजी “डेमो” से निकलकर “स्केल” की तैयारी में है—और लीड्स/भागीदारी के लिए यहीं अवसर बनता है।
CEA वर्टिकल फार्मिंग में AI कहाँ-कहाँ काम करता है?
सीधा जवाब: AI यहाँ “पौधा उगाता” नहीं, बल्कि माइक्रो-क्लाइमेट को लगातार ऑप्टिमाइज़ करता है—और इंसान/टीम के निर्णयों को तेज और सटीक बनाता है।
1) सेंसर डेटा से वातावरण का सटीक नियंत्रण
CEA में सामान्यतः ये पैरामीटर लगातार मॉनिटर/कंट्रोल होते हैं:
- तापमान (दिन/रात अलग सेट-पॉइंट)
- आर्द्रता (RH)
- CO₂ स्तर
- प्रकाश: intensity, spectrum, photoperiod
- पानी/पोषण:
EC,pH, dissolved oxygen - एयरफ्लो और रोग जोखिम (फंगल स्पोर के लिए नमी/तापमान का पैटर्न)
AI का रोल अक्सर यहाँ होता है:
- असामान्य पैटर्न पहचानना (जैसे RH का “धीरे-धीरे” बढ़ना जो फफूंदी को बुलावा देता है)
- प्रेडिक्टिव कंट्रोल (सिर्फ रिएक्ट नहीं—आने वाली स्थिति का अनुमान)
- ऊर्जा/लागत ऑप्टिमाइज़ेशन (किस समय रोशनी/कूलिंग चलानी है)
2) गुणवत्ता को “मापने योग्य” बनाना
प्रीमियम स्ट्रॉबेरी में गुणवत्ता अक्सर इन्हीं चीज़ों से परखी जाती है:
- आकार और एकरूपता
- रंग और चमक
- शुगर कंटेंट (Brix)
- खुशबू/अरोमा प्रोफाइल (इंडायरेक्ट संकेतक)
- शेल्फ लाइफ
AI-ड्रिवन CEA में आप “एक बार अच्छा” नहीं, बल्कि हर बैच में लगभग समान गुणवत्ता पाने की कोशिश करते हैं। यही रिटेलर्स और एक्सपोर्ट मार्केट के लिए निर्णायक होता है।
3) ऑपरेशन: SOP का ऑटोमेशन + टीम की गलतियाँ कम
Agroz OS जैसे सिस्टम का एक बड़ा लाभ यह होता है कि:
- कौन सा टास्क कब होगा (सिंचाई, पोषक मिश्रण, ट्रे शिफ्टिंग)
- अलर्ट और एक्शन-लिस्ट (जोखिम बढ़ा तो क्या करना है)
- कम्युनिकेशन/लॉगिंग (टीम में accountability)
AI का फायदा तभी टिकता है जब खेत/फार्म के SOP साफ हों। बहुत सी टीमें यहीं चूकती हैं—वे सेंसर तो लगा देती हैं, पर ऑपरेशन को डेटा-संगत नहीं बनातीं।
रोबोटिक्स (Walker S) से उत्पादकता क्यों बढ़ती है?
सीधा जवाब: रोबोटिक्स का लक्ष्य “किसान को हटाना” नहीं, बल्कि दोहराए जाने वाले कामों को स्थिर गुणवत्ता के साथ कराना और इंसानों को निरीक्षण/निर्णय पर फोकस करवाना है।
खबर में Agroz Robotics का उल्लेख है, जिसमें ‘Walker S’ AI Humanoid Robots को CEA वर्टिकल फार्म में मॉनिटरिंग और मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे रोबोट आमतौर पर ये वैल्यू देते हैं:
- रूटीन निरीक्षण: हर रैक/लेयर पर समान तरीके से विज़ुअल चेक
- डेटा कैप्चर: इमेज/वीडियो से पौधे की वृद्धि, पत्तियों का रंग, रोग संकेत
- लेबर निर्भरता घटाना: खासकर शिफ्ट-आधारित काम, रात/सुबह के राउंड
- कंसिस्टेंसी: इंसान की थकान से होने वाली मिसिंग या वैरिएशन कम
मेरे अनुभव में, ऑटोमेशन का ROI दो जगह से आता है: (1) बर्बादी/रीवर्क कम, (2) समय पर सही एक्शन। CEA में “समय पर” का मतलब कई बार घंटों का खेल होता है—दिनों का नहीं।
भारत के लिए इसका मतलब: स्ट्रॉबेरी से आगे की सीख
सीधा जवाब: यह मॉडल बताता है कि AI-आधारित सटीक खेती उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए जल्दी परिणाम देती है—और फिर वही पैटर्न दूसरी फसलों पर लागू किया जा सकता है।
भारत में स्ट्रॉबेरी (महाराष्ट्र, हिमाचल, उत्तराखंड आदि) पहले से उगाई जाती है, लेकिन चुनौतियाँ आम हैं:
- अनियमित तापमान/नमी से गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव
- रोग/फफूंदी का जोखिम
- पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस और शेल्फ लाइफ
- प्रीमियम मार्केट के लिए ग्रेडिंग/कंसिस्टेंसी
Agroz जैसी केस स्टडी का संदेश यह है कि:
1) “AI” का मतलब पहले डेटा अनुशासन
यदि आप खुले खेत में हैं, तब भी आप शुरुआत कर सकते हैं:
- माइक्रो-वेधर स्टेशन + मिट्टी नमी सेंसर
- स्प्रे/सिंचाई का डिजिटल लॉग
- तस्वीरों का नियमित रिकॉर्ड (एक ही एंगल/समय)
AI मॉडल बाद में आएगा। पहले डेटा की आदत बनती है।
2) उच्च मूल्य फसलें: ROI जल्दी दिखाती हैं
AI/सेंसर/ऑटोमेशन का खर्च तब जायज़ लगता है जब:
- आपकी फसल का मूल्य अधिक हो
- गुणवत्ता अंतर से कीमत में बड़ा फर्क पड़े
- नुकसान (wastage) की लागत भारी हो
यही कारण है कि स्ट्रॉबेरी, चेरी टमाटर, शिमला मिर्च, लेट्यूस, हर्ब्स, एक्सपोर्ट-ग्रेड फूल—इन सबमें स्मार्ट खेती जल्दी जमती है।
3) CEA को “इलेक्ट्रिसिटी-खर्चीला” कहकर खारिज मत करें—पर आंख बंद करके अपनाएँ भी नहीं
भारत में CEA के लिए सही तरीका अक्सर हाइब्रिड होता है:
- नेट-हाउस/पॉलीहाउस में सेंसर-आधारित नियंत्रण
- कुछ फसलों/स्टेज के लिए इनडोर (नर्सरी, हाई वैल्यू बैच)
- ऊर्जा लागत पर स्पष्ट गणित: कूलिंग, लाइटिंग, बैकअप
जो लोग सिर्फ “टेक देखकर” सेटअप लगा लेते हैं, वे बाद में ऑपरेशन कॉस्ट में फँसते हैं।
अगर आप किसान/एग्री-उद्यमी हैं: शुरू कहाँ से करें?
सीधा जवाब: तीन पायलट बनाइए—(1) डेटा, (2) निर्णय, (3) गुणवत्ता—और 90 दिनों में सीख निकालिए।
90-दिन का व्यावहारिक प्लान
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डेटा पायलट (पहले 30 दिन)
- 2–3 सेंसर (तापमान/नमी, मिट्टी नमी या
EC/pH) - रोज़ एक बार फोटो लॉग
- सिंचाई/खाद/स्प्रे का डिजिटल रिकॉर्ड
- 2–3 सेंसर (तापमान/नमी, मिट्टी नमी या
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निर्णय पायलट (अगले 30 दिन)
- थ्रेशहोल्ड सेट करें (जैसे RH 80% से ऊपर = अलर्ट)
- SOP लिखें: अलर्ट आया तो कौन क्या करेगा
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गुणवत्ता पायलट (अंतिम 30 दिन)
- ग्रेडिंग मानक तय करें (आकार, वजन, नुकसान प्रतिशत)
- 1–2 मीट्रिक ट्रैक करें: रिजेक्ट रेट, शेल्फ लाइफ, औसत वजन
“कॉपी-पेस्ट” करने वाली गलती से बचें
Agroz का सेटअप NASDAQ-लिस्टेड कंपनी का है—आपको वैसा ही बनाना जरूरी नहीं। सीख यह है कि फसल को डेटा-सिस्टम में बदलो। स्केल आपकी जेब, बाजार और टीम के अनुसार होगा।
स्निपेट-लायक लाइन: स्मार्ट खेती में असली जीत सेंसर खरीदने से नहीं, सेंसर के आधार पर लिए गए फैसलों से आती है।
खेती में AI का अगला पड़ाव: “कोपायलट” से “ऑटो-पायलट” तक
सीधा जवाब: अगले 2–3 वर्षों में हम अधिक सिस्टम देखेंगे जहाँ AI सुझाव देने के साथ-साथ कुछ कार्यों को स्वचालित रूप से निष्पादित भी करेगा—खासकर CEA में।
Agroz Copilot for Farmers जैसी अवधारणा इसलिए अहम है क्योंकि अधिकांश फार्म-टीमें डेटा पढ़ तो लेती हैं, पर निर्णय लेने में समय लगा देती हैं। “कोपायलट” का काम है:
- जटिल डैशबोर्ड को सरल एक्शन में बदलना
- नए स्टाफ को SOP के साथ तेज़ी से ऑनबोर्ड करना
- हर शिफ्ट में समान निर्णय गुणवत्ता बनाए रखना
और फिर रोबोटिक्स जैसे Walker S उस निर्णय को “ग्राउंड” पर लागू करने में मदद करता है।
दिशा साफ है: फार्म → डेटा → निर्णय → कार्रवाई → फीडबैक → बेहतर फार्म। यही स्मार्ट खेती का चक्र है।
अगला कदम: आपकी फसल के लिए AI कहाँ फिट बैठेगा?
अगर आप इस सीरीज़ “कृषि और स्मार्ट खेती में AI” को फॉलो कर रहे हैं, तो यह केस स्टडी एक सीधी सीख देती है—AI का सबसे मजबूत उपयोग वहाँ है जहाँ वैरिएशन महँगा पड़ता है: गुणवत्ता, रोग, ऊर्जा, और समय।
आप चाहें तो आज से ही एक छोटा लक्ष्य चुनें:
- रोग का जोखिम 20% कम करना
- पानी की खपत 10–15% घटाना
- रिजेक्ट/ग्रेड-बी माल 5–8% कम करना
फिर उसी लक्ष्य के हिसाब से सेंसर, डेटा और ऑटोमेशन जोड़ें। टेक्नोलॉजी का मूल्य “कूल” दिखने में नहीं, मापने योग्य परिणाम में है।
आखिर में एक सीधा सवाल आपके लिए: आपके खेत/फार्म में कौन सा निर्णय ऐसा है जो रोज़ लिया जाता है, लेकिन डेटा के बिना लिया जाता है—और अगर वही डेटा-सपोर्टेड हो जाए तो सबसे ज्यादा पैसा/समय बचेगा?