AI के साथ मार्केटिंग इफेक्टिवनेस: 50+ मेट्रिक्स से निकलकर इंक्रीमेंटैलिटी, आउटकम और meaningful engagement पर फोकस करें।
AI के साथ मार्केटिंग: 50 मेट्रिक्स नहीं, असली असर
कई ब्रांड एक ही कैंपेन के लिए 50+ मेट्रिक्स ट्रैक कर रहे हैं—और फिर भी मीटिंग के अंत में वही सवाल रह जाता है: “तो सच में काम क्या किया?” यही वो मोड़ है जहाँ मार्केटिंग की दिशा बदल रही है। Ebiquity ने हाल ही में एक नई भूमिका बनाई—Chief Marketing Effectiveness Officer—जो संकेत देती है कि इंडस्ट्री अब “ज्यादा डेटा” से “ज्यादा मतलब” की तरफ बढ़ रही है।
मेरे अनुभव में, समस्या डेटा की कमी नहीं है। समस्या है कि डेटा निर्णय नहीं बन पा रहा। खासकर ई-कॉमर्स और रिटेल में, जहाँ हर क्लिक, हर इम्प्रेशन, हर कार्ट-एड एक नंबर बन जाता है—और टीमें रिपोर्टिंग में फँसकर असल बिज़नेस सवाल भूल जाती हैं: इंक्रीमेंटल सेल्स कितनी बढ़ीं? नया ग्राहक कितना आया? री-परचेज बढ़ा या नहीं?
यह पोस्ट उसी शिफ्ट को समझाती है—और दिखाती है कि AI कैसे डेटा और अर्थ (meaning) के बीच पुल बन सकता है: मेट्रिक्स को छोटा करना, cause vs coincidence अलग करना, और कंटेंट/क्रिएटिव को ऐसे ढालना कि दर्शक से रिश्ता बने—खासकर मीडिया और मनोरंजन-प्रेरित रिटेल मार्केटिंग में।
मेट्रिक्स बढ़ रहे हैं, स्पष्टता घट रही है—क्यों?
सीधा जवाब: क्योंकि ज्यादातर मेट्रिक्स activity दिखाते हैं, impact नहीं। और अलग-अलग सिस्टम अलग कहानी सुनाते हैं।
डिजिटल चैनल बढ़े, डेटा वॉल्यूम बढ़ा, डैशबोर्ड बढ़े—पर कारण-परिणाम (cause-effect) की लाइन और धुंधली हो गई। एक प्लेटफ़ॉर्म कहता है “मेरे कारण कन्वर्ज़न हुआ”, दूसरा कहता है “असिस्ट मैंने किया”, तीसरा कहता है “लास्ट क्लिक मेरा था।” नतीजा? मेट्रिक्स का ढेर, निर्णय का अकाल।
Ebiquity के संदर्भ में यह बदलाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि कंपनी अब “मैनेजमेंट” से ज़्यादा “इफेक्टिवनेस” को केंद्र में ला रही है—यानी शुरुआत में ही यह तय करना कि सफलता कैसी दिखेगी, कौन से सिग्नल काम के हैं, और किन्हें छोड़ देना चाहिए।
ई-कॉमर्स में यह समस्या और तेज़ क्यों है?
सीधा जवाब: क्योंकि ई-कॉमर्स में हर स्टेप measurable है, इसलिए हर स्टेप पर KPI बना दिया जाता है।
रिटेल/ई-कॉमर्स में आप आमतौर पर यह सब एक साथ ट्रैक करते हैं:
- इंप्रेशन, व्यू-थ्रू, CTR
- ऐड-टू-कार्ट, चेकआउट स्टार्ट
- ROAS, CAC, AOV
- ऐप इंस्टॉल, रिटेंशन, LTV
इनमें से कई मेट्रिक्स जरूरी हैं—लेकिन एक साथ 50 मेट्रिक्स रखने का मतलब अक्सर यह होता है कि टीम के पास प्राथमिकता नहीं है।
“इफेक्टिवनेस” का असली मतलब: इंक्रीमेंटैलिटी और बिज़नेस आउटकम
सीधा जवाब: इफेक्टिवनेस का मतलब है—जो बदलाव आपने देखा, उसमें से कितना हिस्सा वास्तव में मार्केटिंग के कारण हुआ।
Ebiquity की नई भूमिका का फोकस उन सवालों पर है जिन्हें बहुत टीमें टालती हैं:
- इंक्रीमेंटैलिटी: अगर यह ऐड न चलता, तो बिक्री कितनी होती?
- चैनल स्ट्रेस-टेस्टिंग: कौन सा चैनल असल में बढ़त दे रहा है, और कौन सिर्फ क्रेडिट ले रहा है?
- मेट्रिक फ्रेमवर्क छोटा करना: bloated scorecards को टाइट स्कोरकार्ड में बदलना—जो सीधे बिज़नेस आउटकम से जुड़ा हो।
6-मेट्रिक स्कोरकार्ड: ई-कॉमर्स टीम के लिए एक व्यावहारिक मॉडल
सीधा जवाब: ज्यादातर रिटेल ब्रांड 6 मेट्रिक्स में 80% सही निर्णय ले सकते हैं।
मैंने कई टीमों में यह देखा है कि नीचे वाला सेट पर्याप्त स्पष्टता देता है (ज़रूरत के हिसाब से बदलिए):
- Incremental Revenue (या holdout आधारित uplift)
- New Customers (नेट-न्यू, न कि कुल)
- Contribution Margin (छूट/रिटर्न/लॉजिस्टिक्स के बाद)
- Repeat Purchase Rate (30/60/90 दिन)
- Brand Search Lift (ब्रांडेड सर्च/डायरेक्ट ट्रैफिक में बदलाव)
- Creative/Content Quality Signal (जैसे 3-sec view rate + saves/shares का इंडेक्स)
यह स्कोरकार्ड “क्लिक्स” से आगे जाता है, और व्यापारिक प्रभाव पकड़ता है।
AI यहाँ क्या बदलता है: डेटा प्रोसेसिंग नहीं, “मतलब निकालना”
सीधा जवाब: AI रिपोर्ट जल्दी बना देता है; पर असली फायदा तब है जब AI आपको बताए कि क्या मायने रखता है और अब करना क्या है।
Ebiquity के संदर्भ में एक अहम बात है: ऑटोमेशन/AI तकनीकी काम तेज़ करेगा—डेटा प्रोसेसिंग, मॉडलिंग, रिपोर्टिंग—पर इंसानी भूमिका अभी भी रहती है: कॉन्टेक्स्ट में निर्णय।
यहीं AI को सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए—एक “डैशबोर्ड जनरेटर” की तरह नहीं, बल्कि एक decision support system की तरह।
1) मेट्रिक्स को “कारण” में बदलना (Cause vs Coincidence)
सीधा जवाब: AI मल्टी-टच डेटा में पैटर्न ढूँढ सकता है, लेकिन आपको उसे इंक्रीमेंटैलिटी-फ्रेंडली ढांचे में बाँधना होगा।
व्यावहारिक तरीके:
- Geo experiments: कुछ शहरों/पिनकोड में एक्सपोज़र बदलकर तुलना
- Holdout groups: ऑडियंस का एक हिस्सा जानबूझकर न दिखाकर uplift मापना
- Marketing Mix Modeling (MMM): खासकर रिटेल में, जहाँ चैनल बहुत हैं और डेटा बिखरा है
AI इन तरीकों में समय घटाता है: डेटा क्लीनिंग, फीचर इंजीनियरिंग, और scenario planning ("अगर बजट 20% CTV से सोशल में शिफ्ट करें तो?")
2) पर्सनलाइज़ेशन जो “कन्वर्ज़न” नहीं, “रिश्ता” बढ़ाए
सीधा जवाब: रिटेल में पर्सनलाइज़ेशन का लक्ष्य सिर्फ खरीद नहीं—रिटेंशन और विश्वास है।
यही जगह मीडिया/मनोरंजन वाला एंगल जुड़ता है। आज रिटेल ब्रांड कंटेंट कंपनी भी हैं—रील्स, शॉर्ट वीडियो, लाइव कॉमर्स, क्रिएटर-कोलैब। AI मदद कर सकता है:
- कंटेंट टैक्सोनॉमी: कौन सा थीम (फिटनेस, फैमिली, फेस्टिव) किस सेगमेंट पर काम करता है
- क्रिएटिव वेरिएंट जनरेशन: अलग-अलग हुक/पेस/ऑफर कॉम्बिनेशन
- मेसेंजिंग consistency: ब्रांड टोन बनाए रखते हुए अलग प्लेटफ़ॉर्म के हिसाब से एडॉप्ट
लेकिन चेतावनी साफ है: “जस्ट गुड एनफ” कंटेंट बहुत जल्दी बन जाता है। जीत वही ब्रांडेंगे जो AI को क्वालिटी-गेट्स और ब्रांड गाइडलाइन्स के साथ चलाएँगे।
3) “टाइट स्कोरकार्ड” को ऑटो-पायलट नहीं, ऑटो-रडार बनाइए
सीधा जवाब: AI को KPI चुनने दीजिए, KPI चलाने नहीं।
AI आपकी टीम को यह बता सकता है कि कौन सा मेट्रिक redundant है, कौन predictive है, और किसका बिज़नेस आउटकम से कमजोर संबंध है। लेकिन अंतिम निर्णय—किस KPI पर बोनस/एजेंसी फीस/बजट निर्भर होगा—यह रणनीतिक और नैतिक दोनों तरह का फैसला है।
एजेंसी/वेंडर पेमेंट “आउटकम” पर जाए, उससे पहले ये 5 सवाल तय करें
सीधा जवाब: आउटकम-बेस्ड मॉडल तभी काम करेगा जब measurement पर पहले सहमति बने।
जैसे-जैसे ब्रांड एजेंसी अरेंजमेंट पर पुनर्विचार कर रहे हैं, “परफॉर्मेंस” की परिभाषा लड़ाई का मैदान बन जाती है। किसी भी outcome-based compensation से पहले यह तय कर लीजिए:
- आउटकम क्या है? (Incremental revenue, net-new customers, margin?)
- टाइम विंडो क्या होगी? (7 दिन, 30 दिन, 90 दिन?)
- कौन सा डेटा सोर्स “फाइनल” है? (CDP, analytics, POS, marketplace?)
- बेसलाइन कैसे तय होगी? (Seasonality, promotions, stock-outs?)
- क्रिएटिव बनाम मीडिया का क्रेडिट कैसे बाँटेंगे?
रिटेल में खासकर स्टॉक-आउट, डिस्काउंटिंग और डिलीवरी SLA जैसे फैक्टर परिणाम बदल देते हैं। AI इन वेरिएबल्स को मॉडल कर सकता है, पर governance आपकी टीम को ही बनाना होगा।
Q&A: रिटेल मार्केटर्स जो अक्सर पूछते हैं
क्या ROAS को छोड़ देना चाहिए?
सीधा जवाब: नहीं—पर ROAS को “निर्णय का राजा” बनाना गलती है।
ROAS अक्सर short-term और last-click bias से प्रभावित होता है। इसे incremental lift और margin के साथ जोड़िए।
क्या MMM छोटे ब्रांड के लिए भी संभव है?
सीधा जवाब: हाँ, अगर आप scope छोटा रखें और 3–5 चैनल से शुरू करें।
AI ने MMM की लागत और समय दोनों घटाए हैं, खासकर जब आपके पास 18–24 महीने का चैनल स्पेंड और सेल्स डेटा उपलब्ध हो।
“Meaning” मापेंगे कैसे?
सीधा जवाब: meaning का प्रॉक्सी “attention + याद रहना + लौटकर आना” है।
व्यावहारिक माप:
- branded search lift
- direct traffic trend
- repeat purchase rate
- content saves/shares और longer watch time (जहाँ लागू हो)
आपकी टीम के लिए 30-दिन का एक्शन प्लान (AI के साथ)
सीधा जवाब: एक महीने में आप मेट्रिक्स घटाकर निर्णय तेज़ कर सकते हैं—बिना टेक स्टैक बदले।
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दिन 1-7: KPI डाइट
- 50 मेट्रिक्स की सूची बनाइए
- हर मेट्रिक पर पूछिए: “अगर यह 0 हो जाए तो क्या निर्णय बदलेगा?”
- 6–10 मेट्रिक्स पर लॉक कीजिए
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दिन 8-15: एक इंक्रीमेंटैलिटी टेस्ट
- geo holdout या audience holdout का छोटा प्रयोग
- एक ही आउटकम चुनें (जैसे net-new customers)
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दिन 16-23: AI-आधारित क्रिएटिव एनालिसिस
- टॉप 20 ads/creatives निकालें
- थीम, ऑफर, हुक, लंबाई, पैसिंग टैग करें
- किन पैटर्न्स से repeat या net-new बढ़ता है, नोट करें
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दिन 24-30: scenario planning मीटिंग
- “अगर 15% बजट शिफ्ट करें तो?” के 3 सीनारियो
- हर सीनारियो के लिए 2 जोखिम और 2 अपेक्षित लाभ लिखें
जहाँ मार्केटिंग जा रही है: मेट्रिक्स से आगे, मतलब की तरफ
डेटा का दौर खत्म नहीं हुआ है—वो तो और बढ़ेगा। लेकिन 2026 की जीत उन टीमों की होगी जो कम मेट्रिक्स में बेहतर निर्णय लेती हैं, और AI को “रिपोर्टिंग मशीन” नहीं, समझ बढ़ाने वाला साथी बनाती हैं।
ई-कॉमर्स और रिटेल में AI का असली मूल्य मांग पूर्वानुमान या सिफारिश इंजन तक सीमित नहीं है। यह मार्केटिंग इफेक्टिवनेस में भी उतना ही बड़ा काम कर सकता है—जहाँ सवाल होता है: किस दर्शक के लिए, किस कहानी के साथ, किस चैनल पर, किस समय—और किस बिज़नेस परिणाम के लिए?
अगर आपकी टीम अभी भी 50 मेट्रिक्स देख रही है, तो एक छोटा प्रयोग कीजिए: अगले कैंपेन रिव्यू में सिर्फ 6 मेट्रिक्स लेकर बैठिए। मीटिंग छोटी होगी। बहस बेहतर होगी। और फैसला तेज़। फिर बताइए—क्या आप पहली बार “मतलब” पर पहुंचे?