खराब RF माप नेटवर्क को गलत दिशा में ले जाते हैं। जानें कैसे AI और बेहतर मापन Wi‑Fi/Private 5G डिज़ाइन व ऑप्टिमाइज़ेशन को भरोसेमंद बनाते हैं।
गलत माप, कमजोर नेटवर्क: 5G/Wi‑Fi में AI की असली भूमिका
एक नेटवर्क अक्सर “कमज़ोर” नहीं होता—उसे कमज़ोर साबित करने वाले माप कमज़ोर होते हैं। अगर सर्वे डेटा ही झूठा निकला, तो डिज़ाइन भी गलत होगा, ऑप्टिमाइज़ेशन भी गलत दिशा में जाएगा, और ट्रबलशूटिंग तो बस “अंदाज़े” बनकर रह जाएगी। यही वजह है कि Wi‑Fi और अब Private 5G/एंटरप्राइज़ 5G में सबसे बड़ा, सबसे शांत नुकसान खराब माप (Bad Measurements) करता है।
Ekahau की चर्चा का सार साफ है: पुराने USB डोंगल/एडॉप्टर बहुत सालों से चलते आ रहे हैं, लेकिन वे RF माप के लिए बने ही नहीं थे। वे कनेक्टिविटी के लिए ठीक-ठाक हो सकते हैं, पर सटीक सिग्नल स्ट्रेंथ और स्थिर फ्रीक्वेंसी रिस्पॉन्स देने में अक्सर फिसल जाते हैं। और जब सिग्नल का “सच” ही डगमग है, तो 5G, Wi‑Fi 6/6E/7, या इंडस्ट्रियल IoT जैसी हाई‑स्टेक सेटअप में आपकी टीम की विश्वसनीयता भी दांव पर लगती है।
इस “दूरसंचार और 5G में AI” सीरीज़ में मैं इसे एक बुनियादी नियम मानता हूँ: AI नेटवर्क को तभी बेहतर करेगा जब इनपुट डेटा भरोसेमंद हो। AI का सबसे बड़ा फायदा यहीं से शुरू होता है—माप को स्थिर, दोहराने योग्य (repeatable) और ऑटोमेटेड बनाकर।
खराब माप नेटवर्क को कैसे बिगाड़ते हैं (और नुकसान कहाँ होता है)
सीधा असर: गलत माप आपको गलत फैसले करवा देते हैं—और वायरलेस में हर गलत फैसला महँगा पड़ता है।
Wi‑Fi साइट सर्वे या 5G रेडियो प्लानिंग में हम जिन बातों पर भरोसा करते हैं, वे माप पर टिकी होती हैं: कवरेज, SNR, इंटरफेरेंस, चैनल प्लान, हैंडओवर, क्लाइंट डेंसिटी, और QoS। अगर आपने सिग्नल स्ट्रेंथ को 8–10 dB ज़्यादा/कम पढ़ लिया, तो “एक AP और लगा दें” या “पावर बढ़ा दें” जैसे कदम तुरंत निकल आते हैं। नतीजा:
- ओवर‑डिप्लॉयमेंट: ज़रूरत से ज्यादा AP/Small Cells, CAPEX बढ़ता है
- को‑चैनल इंटरफेरेंस: ज़्यादा रेडियो, वही चैनल, थ्रूपुट गिरता है
- री‑सर्वे और री‑वर्क: टीम का समय जाता है, प्रोजेक्ट स्लिप होता है
- यूज़र एक्सपीरियंस: कॉल/वीडियो/स्कैनर/VoIP/AR‑VR में ड्रॉप और लैग
दिसंबर 2025 के हिसाब से यह और भी प्रासंगिक है, क्योंकि बहुत-सी कंपनियाँ वर्ष‑अंत (Q4) में अपग्रेड/री‑डिज़ाइन करती हैं—Wi‑Fi 6E/7 रोलआउट, वेयरहाउस ऑटोमेशन, रिटेल पीक‑सीज़न के बाद रिमेडिएशन, और नए साल से पहले Private 5G पायलट। इस समय गलत माप का मतलब अक्सर “जनवरी में फिर से वही काम” होता है।
USB एडॉप्टर क्यों धोखा दे सकते हैं
मुख्य बात: USB डोंगल और लैपटॉप एडॉप्टर आमतौर पर माप‑ग्रेड (measurement‑grade) नहीं होते। वे डेटा कनेक्शन के लिए बनाए गए थे, RF इंस्ट्रूमेंटेशन के लिए नहीं।
Ekahau के स्रोत में भी यह पॉइंट साफ है: सिग्नल रीडिंग चलने की दिशा, बॉडी‑पोश्चर, डिवाइस का कोण, और AP की लोकेशन जैसे कारणों से बदल सकती है। कभी-कभी आप “लकी” होकर ठीक नतीजा पा सकते हैं—पर नेटवर्क इंजीनियरिंग में “लकी” एक स्ट्रैटेजी नहीं है।
Ekahau के लैब निष्कर्ष से क्या सीख मिलती है (5 dB बनाम 25–26 dB)
सीधा संदेश: अगर आपका माप‑टूल खुद ही बहुत वैरिएबल है, तो आप नेटवर्क की समस्या नहीं, टूल की समस्या मैप कर रहे हैं।
Ekahau ने एक बाहरी RF लैब से तुलना कराई—Ekahau Sidekick बनाम आम USB एडॉप्टर। रिपोर्ट का सबसे उपयोगी नंबर यह है:
- Ekahau Sidekick का फ्रीक्वेंसी रिस्पॉन्स वैरिएशन ~5 dB (औसतन)
- USB एडॉप्टर जैसे Proxim 8494 का ~26 dB
- Comfast CF‑912AC का ~25 dB
वायरलेस में 20 dB का फर्क मज़ाक नहीं है। 20 dB का मतलब आपके डिज़ाइन में ऐसा अंतर आ सकता है कि जहाँ आपको “ठीक कवरेज” दिख रही है, वहाँ असल में डेड‑ज़ोन निकल आए—या जहाँ आपको डेड‑ज़ोन दिख रहा है, वहाँ आपने अनावश्यक हार्डवेयर जोड़ दिया।
5G और Wi‑Fi में यह फर्क और बड़ा क्यों हो जाता है
क्योंकि नेटवर्क अब ज्यादा घना और ज्यादा डायनैमिक है।
- Wi‑Fi 6E/7 और 6 GHz में कवरेज पैटर्न अलग होते हैं; छोटी‑छोटी बाधाएँ भी असर करती हैं
- Private 5G में इंडस्ट्रियल साइट्स (मशीनरी, मेटल रैक, हाई‑सीलिंग) RF को ज्यादा “ट्विस्ट” करती हैं
- रियल‑टाइम ऐप्स (VoIP, AGV, विज़न कैमरा) में कुछ dB भी SLA तोड़ सकता है
AI कहाँ फिट बैठता है: माप से लेकर निर्णय तक “क्लोज़्ड‑लूप”
AI की असली भूमिका “मैजिक” करना नहीं है—AI का काम है अच्छे डेटा से तेज़ और बेहतर निर्णय निकालना। और अच्छे डेटा की शुरुआत स्थिर माप से होती है।
मैं इसे तीन लेयर में देखता हूँ:
1) AI‑assisted डेटा कलेक्शन: इंसानी वेरिएशन कम करना
फील्ड सर्वे में सबसे बड़ी दिक्कत इंसान है—हर इंसान अलग तरह से चलता है, अलग एंगल रखता है, अलग स्पीड से रूट पूरा करता है। AI‑समर्थ टूलिंग/वर्कफ़्लो यहाँ मदद कर सकती है:
- स्टैंडर्डाइज्ड सर्वे पाथ सुझाव: किस हिस्से में ज्यादा पॉइंट चाहिए
- आउटलायर डिटेक्शन: अगर रीडिंग अचानक असामान्य हो, तो उसी समय री‑मेज़र
- कंसिस्टेंसी स्कोर: सर्वे रन की गुणवत्ता को एक मीट्रिक में कैद करना
यहां “AI” का मतलब अक्सर ML‑आधारित पैटर्न पहचान होता है, जो बताता है कि डेटा भरोसेमंद है या नहीं।
2) AI‑driven डिज़ाइन/ऑप्टिमाइज़ेशन: गलत निष्कर्षों से बचना
जब माप ठीक हों, तब AI मॉडल:
- AP/Small Cell प्लेसमेंट को कम ट्रायल‑एंड‑एरर में फाइनल कर सकता है
- चैनल/पावर सेटिंग्स में को‑चैनल इंटरफेरेंस घटाने के लिए सुझाव दे सकता है
- “कहाँ अतिरिक्त हार्डवेयर चाहिए” बनाम “कहाँ सिर्फ ट्यूनिंग चाहिए” अलग कर सकता है
प्रैक्टिकल बात: सटीक माप आपको “हार्डवेयर जोड़ो” की जगह “कन्फ़िग ट्यून करो” की तरफ ले जाते हैं। बजट और समय—दोनों बचते हैं।
3) क्लोज़्ड‑लूप नेटवर्क ऑप्स: माप → बदलाव → वैलिडेशन
सबसे मजबूत ऑपरेटिंग मॉडल यह है:
- साइट पर माप/टेलीमेट्री इकट्ठा करें
- AI/एनालिटिक्स से वजह निकालें (इंटरफेरेंस, रोअमिंग, क्लाइंट ड्राइवर्स, आदि)
- बदलाव करें (चैनल/पावर/प्लेसमेंट/पॉलिसी)
- तुरंत वैलिडेट करें कि KPI सुधरे या नहीं
अगर माप टूल ही अनिश्चित है, तो Step 4 बेकार हो जाता है—आप सुधार को साबित नहीं कर पाएंगे।
फील्ड टीम के लिए “माप‑फर्स्ट” चेकलिस्ट (Wi‑Fi और Private 5G)
एक्शनable नियम: अच्छे नेटवर्क की शुरुआत सर्वे क्वालिटी से होती है, न कि “नया हार्डवेयर” खरीदने से।
सर्वे से पहले
- माप‑ग्रेड टूल/डिवाइस चुनें (कंज्यूमर USB डोंगल पर निर्भर न रहें)
- एक ही साइट पर दो रन का प्लान बनाएं—पहला बेसलाइन, दूसरा वैलिडेशन
- “सफलता” को KPI में लिखें: RSSI/SNR थ्रेशहोल्ड, पैकेट लॉस, लेटेंसी, रोअमिंग टाइम
सर्वे के दौरान
- एक जैसा होल्डिंग पोज़िशन/ऊंचाई रखें (जैसे 1.2–1.5m)
- मैप पर समान दूरी पर सैंपलिंग करें (ओवर‑स्पार्स पॉइंट्स न रखें)
- AI/टूल अगर “लो‑क्वालिटी डेटा” फ्लैग करे, तो वहीं रुककर री‑कलेक्ट करें
सर्वे के बाद
- “हीटमैप सुंदर है” से आगे जाएँ—वेरिएशन देखें: क्या दो रन के नतीजे मेल खा रहे हैं?
- जिन ज़ोन्स में वैरिएशन ज़्यादा हो, वहाँ इंटरफेरेंस/रिफ्लेक्शन की संभावना पहले जांचें
एक छोटा, वास्तविक‑जैसा उदाहरण: वेयरहाउस में गलत माप का बिल
मान लीजिए 2 लाख वर्गफुट का वेयरहाउस है—मेटल रैक, हाई‑सीलिंग, स्कैनर और AGV चल रहे हैं। एक टीम USB एडॉप्टर से सर्वे करती है और कुछ aisles में कम RSSI दिखता है। वे 12 अतिरिक्त AP जोड़ देते हैं।
दो हफ्ते बाद:
- थ्रूपुट सुधरने की जगह इंटरफेरेंस बढ़ जाता है
- स्कैनर रोअमिंग में देरी से पिकिंग स्लो होती है
- IT को “नेटवर्क फिर से देखो” का टिकट मिलता है
जब वही साइट measurement‑grade डिवाइस + बेहतर वैलिडेशन से जांची जाती है, पता चलता है कि समस्या AP की कमी नहीं थी—चैनल प्लान और पावर ट्यूनिंग थी, और कुछ जगहों पर रैक की वजह से मल्टीपाथ। 12 AP की जगह 3 AP relocation + ट्यूनिंग से काम हो गया।
मैंने ऐसे केस में सबसे बड़ा सबक यही देखा है: गलत माप हार्डवेयर‑हेवी समाधान की तरफ धकेलते हैं।
AI‑रेडी नेटवर्क के लिए अंतिम बात: “डेटा क्वालिटी” को KPI बनाइए
AI‑आधारित नेटवर्क ऑप्टिमाइज़ेशन, ट्रैफिक विश्लेषण, और ऑटो‑रिमेडिएशन—ये सब तभी भरोसेमंद हैं जब बेसलाइन डेटा सही हो। Wi‑Fi हो या Private 5G, माप की स्थिरता आपका पहला SLA है।
अगर आप 2026 की शुरुआत में Wi‑Fi 6E/7 या एंटरप्राइज़ 5G रोलआउट प्लान कर रहे हैं, तो मैं एक स्पष्ट स्टांस लूंगा: पहले माप‑प्रक्रिया और टूलिंग ठीक कीजिए, फिर AI ऑटोमेशन जोड़िए। उल्टा करेंगे तो AI “तेज़ी से गलत” करेगा।
अब आपकी बारी: आपकी टीम के सर्वे/वैलिडेशन प्रोसेस में सबसे बड़ा रिस्क क्या है—टूल की अनिश्चितता, वर्कफ़्लो की ढील, या KPI की अस्पष्टता?